रायपुर, 27 सितंबर। धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड का ग्राम पंचायत मुल्ले जल संरक्षण की दिशा में स्थानीय संसाधनों और ग्रामीणों की भागीदारी से...
रायपुर, 27 सितंबर। धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड का ग्राम पंचायत मुल्ले जल संरक्षण की दिशा में स्थानीय संसाधनों और ग्रामीणों की भागीदारी से मिसाल बना रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विकसित भारत जीरामजी योजना से गांव में 52 हजार रुपए की लागत से सैंड फिल्टर बनाया गया है। इससे बारिश और सतही बहाव के पानी को रोककर भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था मजबूत करने के साथ स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है।
रेत की प्राकृतिक छनन से भूजल तक पहुंचेगा पानी
बारिश के दौरान खेतों और गलियों से बहकर निकल जाने वाले पानी को सहेजने के लिए सैंड फिल्टर तैयार किया गया है। इसमें रेत और प्राकृतिक छनन माध्यमों का इस्तेमाल होता है, जो पानी के साथ आने वाली मिट्टी, गाद और ठोस अशुद्धियों को रोकते हैं। छनकर साफ हुआ पानी जमीन में समाकर भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करता है।
52 हजार में जल संरक्षण के साथ रोजगार
गांव में सैंड फिल्टर के निर्माण के लिए 52 हजार रुपए की स्वीकृति मिली थी। इसमें 41 हजार रुपए सामग्री और 11 हजार रुपए मजदूरी के लिए निर्धारित थे। निर्माण पूरा होने पर 52 हजार रुपए खर्च हुए, जिसमें 10,500 रुपए मजदूरी पर खर्च किए गए। खास बात यह रही कि निर्माण में गांव के ही श्रमिकों को काम मिला, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का अवसर मिला।
किसानों के लिए भी बढ़ेगी पानी की उपलब्धता
कृषि प्रधान मुल्ले गांव की अर्थव्यवस्था पानी पर निर्भर है। सैंड फिल्टर के जरिए भूजल पुनर्भरण होने से भविष्य में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता को सहारा मिलने की उम्मीद है। इसका असर फसल उत्पादन और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है।
इस पहल ने ग्रामीणों में वर्षा जल को सहेजने की सोच को भी मजबूत किया है। मुल्ले का यह प्रयास दिखाता है कि जल सुरक्षा के लिए बड़े प्रोजेक्टों के साथ स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे और सामुदायिक प्रयास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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