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एसटीपी का पानी अब नहीं होगा बेकार, 50 किमी दायरे में यूजर तलाशेंगे निकाय

उद्योग, रेलवे और थर्मल पावर प्लांट समेत संस्थानों में उपचारित जल के इस्तेमाल की होगी पड़ताल; 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट रायपुर, 22 सितंब...



उद्योग, रेलवे और थर्मल पावर प्लांट समेत संस्थानों में उपचारित जल के इस्तेमाल की होगी पड़ताल; 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

रायपुर, 22 सितंबर 2026। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी को दोबारा उपयोग में लाने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पहल तेज कर दी है। विभाग ने निकायों को एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान करने और उनकी जल जरूरत का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। इनमें थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों को शामिल किया गया है।

राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने प्रदेश के छह नगर निगमों के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन छह निकायों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। निकायों को यह भी पता करना होगा कि संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में उपचारित पानी की जरूरत होगी।

50 किमी के दायरे में तलाशेंगे संभावित उपयोगकर्ता

उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए एसटीपी के आसपास के क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया है। निकायों को 50 किलोमीटर की परिधि में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, सरकारी विभाग और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी पानी की जरूरत की जानकारी लेने को कहा गया है।

इससे एसटीपी शुरू होने के बाद उपचारित पानी की खपत के लिए संभावित उपभोक्ता पहले से चिन्हित किए जा सकेंगे और पानी को बेकार बहने से रोकने में मदद मिलेगी।

छह शहरों में 338 एमएलडी के एसटीपी

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के तहत छह नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी बनाए जा रहे हैं।

  • बीरगांव – 55 एमएलडी
  • भिलाई-चरौदा – 13 एमएलडी
  • भिलाई – 150 एमएलडी
  • दुर्ग – 47 एमएलडी
  • अंबिकापुर – 32 एमएलडी
  • राजनांदगांव – 41 एमएलडी

15 दिन में देनी होगी जानकारी

सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरौदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगांव के निगम आयुक्तों को जारी परिपत्र में भारत सरकार की ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी-2016 का भी उल्लेख किया है। इसके तहत एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी उपचारित जल के पुन: उपयोग को लेकर निर्देश दिए हैं।

निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता से संबंधित जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल के पुन: उपयोग की व्यवस्था पहले से तैयार रहे।


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