250 से 300 क्विंटल उत्पादन; 80 हजार की लागत के बाद 2.87 लाख रुपए की आय, उद्यानिकी विभाग की सलाह से मिला फायदा रायपुर, 23 सितंबर 2026। पार...
250 से 300 क्विंटल उत्पादन; 80 हजार की लागत के बाद 2.87 लाख रुपए की आय, उद्यानिकी विभाग की सलाह से मिला फायदा
रायपुर, 23 सितंबर 2026। पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। लखनपुर विकासखंड के ग्राम पोड़ी निवासी किसान वासुदेव प्रधान ने एक हेक्टेयर में लौकी की खेती कर इसका उदाहरण पेश किया है। उन्होंने करीब 250 से 300 क्विंटल लौकी का उत्पादन लिया। 80 हजार रुपए की लागत के बाद 2 लाख 87 हजार रुपए की कुल आय हुई और करीब 2 लाख 7 हजार रुपए का शुद्ध लाभ मिला।
समय पर खेती और तकनीकी सलाह से बेहतर उत्पादन
वासुदेव ने उद्यानिकी विभाग से मिली तकनीकी जानकारी के आधार पर खरीफ मौसम में एक हेक्टेयर में लौकी की खेती शुरू की। खेत की तैयारी से लेकर फसल प्रबंधन तक जरूरी कृषि कार्य समय पर किए। विभागीय सलाह के अनुसार खेती करने से उत्पादन बेहतर रहा और उन्हें 250 से 300 क्विंटल तक लौकी मिली।
बाजार की मांग ने बढ़ाया फायदा
लौकी की बाजार में अच्छी मांग होने से वासुदेव को उत्पादन का बेहतर मूल्य मिला। करीब 80 हजार रुपए की लागत के मुकाबले 2.87 लाख रुपए की कुल आय हुई। लागत घटाने के बाद 2.07 लाख रुपए का शुद्ध लाभ उनके हिस्से में आया।
पारंपरिक खेती के मुकाबले बढ़ा भरोसा
वासुदेव के अनुसार, पारंपरिक खेती से आमदनी सीमित रहती थी, लेकिन उद्यानिकी फसल अपनाने से कम समय में बेहतर उत्पादन और आय का अवसर मिला। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ खेती को लेकर उनका भरोसा भी बढ़ा है।
अब वे आसपास के किसानों को भी सब्जी और अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि तकनीकी जानकारी, सही फसल प्रबंधन और मेहनत के जरिए सब्जी उत्पादन को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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