नई दिल्ली, 3 अक्टूबर। 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के दौ...
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर। 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत की आर्थिक मजबूती घरेलू क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण और वैश्विक खुलेपन के संतुलन में है।
‘जोखिम के लिए कीमत चुकाती दुनिया’ विषय पर उन्होंने कहा कि कोविड-19, भू-राजनीतिक संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, व्यापार प्रतिबंध और तकनीकी बदलावों ने आर्थिक जोखिमों का स्वरूप बदल दिया है। भूगोल भी फिर से आर्थिक फैसलों के केंद्र में आ गया है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि कंपनियां और सरकारें वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला, रणनीतिक भंडार और घरेलू क्षमता विकसित कर रही हैं। हालांकि, सुदृढ़ता की भी कीमत होती है, इसलिए सुरक्षा पर होने वाली अतिरिक्त लागत और संभावित संकट के नुकसान के बीच संतुलन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत को रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाने के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और वैश्विक बाजारों के लिए खुला रहना चाहिए। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में यह संतुलन खास महत्व रखता है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि ऐसी प्रतिस्पर्धी क्षमता विकसित करना है, जो बाहरी झटकों से देश को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक बाजार में मजबूती दे।

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