स्व-सहायता समूह से मिली पूंजी और मार्गदर्शन ने बढ़ाया हौसला; परिवार की आय बढ़ाने में बनीं सहभागी रायपुर, 20 सितंबर 2026। अवसर और सहयोग ...
स्व-सहायता समूह से मिली पूंजी और मार्गदर्शन ने बढ़ाया हौसला; परिवार की आय बढ़ाने में बनीं सहभागी
रायपुर, 20 सितंबर 2026। अवसर और सहयोग मिल जाए तो मेहनत को नई दिशा मिल सकती है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पाराघाटी की रजनी केरकेट्टा की कहानी इसका उदाहरण है। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों में सीमित भूमिका निभाने वाली रजनी ने मुर्गी पालन को आजीविका का साधन बनाया। स्व-सहायता समूह से मिली आर्थिक मदद और मार्गदर्शन के सहारे उन्होंने इस काम को आगे बढ़ाया और अब परिवार की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
समूह से जुड़ीं तो खुला नया रास्ता
रजनी जीवन ज्योति स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह के जरिए उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की योजनाओं और आजीविका गतिविधियों के लिए मिलने वाली सहायता की जानकारी मिली। मुर्गी पालन को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें सामुदायिक निवेश निधि से 50 हजार रुपए, बैंक लिंकेज के जरिए 1 लाख रुपए और स्वयं सिद्धा के तहत प्रथम वर्ष में 1.50 लाख रुपए की राशि मिली। गतिविधि को आगे जारी रखने के लिए दूसरे वर्ष में भी 1.50 लाख रुपए की राशि का नवीनीकरण किया गया।
इस आर्थिक सहयोग से रजनी ने मुर्गी पालन को विस्तार दिया। समूह से मिले मार्गदर्शन ने उन्हें गतिविधि को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने और आय के अवसर बढ़ाने का भरोसा दिया।
पूंजी के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
रजनी के लिए समूह से मिला सहयोग सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहा। इससे उनमें अपने दम पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी आया। मुर्गी पालन के जरिए वह परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं और आजीविका से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका भी बढ़ी है।
रजनी का अनुभव बताता है कि ग्रामीण महिलाओं को पूंजी, संगठन और सही मार्गदर्शन मिले तो वे अपनी मेहनत और हुनर को आय के स्थायी साधन में बदल सकती हैं।
महिलाओं के लिए बदलाव का जरिया बन रहे समूह
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आजीविका गतिविधियों के लिए आर्थिक और संस्थागत सहयोग दिया जा रहा है। नियमित बचत, बैंक लिंकेज और विभिन्न निधियों के जरिए महिलाएं मुर्गी पालन, पशुपालन, कृषि समेत कई आयमूलक गतिविधियों से जुड़ रही हैं।
इससे परिवार की आय बढ़ाने के साथ आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है। रजनी जैसी महिलाओं के लिए स्व-सहायता समूह अपने पैरों पर खड़े होने का माध्यम बन रहे हैं।
बोलीं- समूह से मिला सहारा, आगे बढ़ने का अवसर
रजनी केरकेट्टा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि शासन की योजनाओं और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने उन्हें अपनी आजीविका आगे बढ़ाने का अवसर दिया। मुर्गी पालन ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की राह दिखाई है।
रजनी की कहानी बताती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को संगठन, पूंजी और मार्गदर्शन का साथ मिलता है, तो वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ अपने आर्थिक फैसले खुद लेने की दिशा में भी आगे बढ़ती हैं।

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