रीजनल साइंस सेंटर में दो दिवसीय ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स’ सत्र; 120 शिक्षकों और बीएड-डीएड विद्यार्थियों ने सीखी नई शिक्षण तकनीकें रायप...
रीजनल साइंस सेंटर में दो दिवसीय ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स’ सत्र; 120 शिक्षकों और बीएड-डीएड विद्यार्थियों ने सीखी नई शिक्षण तकनीकें
रायपुर, 23 सितंबर। गणित को केवल सूत्रों और गणनाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे समझने, सोचने और आनंद लेने का विषय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में 22 और 23 सितंबर को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ विषय पर दो दिवसीय इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया।
पहले दिन रायपुर के चार विकासखंडों से विज्ञान और गणित विषय के करीब 120 शिक्षकों ने ऑफलाइन भाग लिया। जिले के अन्य शिक्षकों के लिए सत्र का ऑनलाइन प्रसारण भी किया गया। प्रशिक्षण में शिक्षकों को गणितीय अवधारणाओं को गतिविधियों, प्रयोगों, अनुभवों और दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़कर पढ़ाने की तकनीकें बताई गईं।
गतिविधियों से कठिन गणित होगा आसान
हैंड्स-ऑन गतिविधियों के जरिए बताया गया कि कठिन लगने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल और रोचक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। छोटे प्रयोग, गणितीय खेल, प्रश्नोत्तरी और रचनात्मक अभ्यास विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि और जिज्ञासा बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।
कार्यक्रम के दूसरे दिन बीएड और डीएड विद्यार्थियों के लिए विशेष इंटरैक्टिव सत्र हुआ। इसमें एससीईआरटी के बीएड-डीएड विद्यार्थी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीएड विद्यार्थी और आईटीईपी के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। भावी शिक्षकों को गतिविधि आधारित और व्यावहारिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया गया, ताकि वे कक्षा में गणित को अधिक प्रभावी और आनंददायक तरीके से पढ़ा सकें।
उत्तर बताने से ज्यादा जरूरी सवाल पूछना
रीजनल साइंस सेंटर के परियोजना निदेशक प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि गणित को विद्यार्थियों के लिए केवल सूत्रों और गणनाओं का विषय नहीं, बल्कि सोचने, समझने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने अनुभवात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षण को गणितीय अवधारणाओं को सहज बनाने का प्रभावी तरीका बताया।
ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन, बेंगलुरु के मैथ कोच बी.एन. राव ने दोनों दिन प्रतिभागियों को गणित शिक्षण की नई विधियों की जानकारी दी। उन्होंने गणितीय खेलों, व्यावहारिक उदाहरणों और हैंड्स-ऑन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को स्वयं सोचने, तर्क करने, सवाल पूछने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि गणित केवल अंकों और सूत्रों का विषय नहीं है। यह विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। दो दिवसीय आयोजन के जरिए वर्तमान शिक्षकों के साथ भावी शिक्षकों को भी गणित पढ़ाने की नई और व्यावहारिक पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया गया।

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