कृत्रिम गर्भाधान से मिली उन्नत नस्ल की बछिया, 18 हजार रुपए की मदद और पशु चिकित्सा से बढ़ा पशुपालन; अब दूध-दही-घी से अतिरिक्त आमदनी रायप...
कृत्रिम गर्भाधान से मिली उन्नत नस्ल की बछिया, 18 हजार रुपए की मदद और पशु चिकित्सा से बढ़ा पशुपालन; अब दूध-दही-घी से अतिरिक्त आमदनी
रायपुर, 20 सितंबर 2026। नारायणपुर जिले के धौड़ाई गांव के किसान विनोद नुरेटी के परिवार के लिए कभी दूध जुटाना भी मुश्किल था। गांव में पर्याप्त दूध उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाजार पर निर्भर रहना पड़ता था। आज यही परिवार न केवल अपनी जरूरत का दूध खुद पैदा कर रहा है, बल्कि दूध, दही और घी बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा रहा है। इस बदलाव की शुरुआत देशी गाय के नस्ल सुधार से हुई।
कृत्रिम गर्भाधान से बदली शुरुआत
दूध की समस्या के स्थायी समाधान के लिए विनोद ने पशुधन विकास विभाग से संपर्क किया। विभाग की सलाह पर उनकी देशी गाय का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। इससे उन्नत नस्ल की बछिया का जन्म हुआ।
विनोद के लिए यह सिर्फ एक बछिया का जन्म नहीं था, बल्कि बेहतर पशुपालन और भविष्य की आय की नई शुरुआत थी।
18 हजार रुपए की मदद से मिला सहारा
बछिया के पोषण और बेहतर पालन के लिए विनोद को पशुधन विकास विभाग की उन्नत मादा वत्स पालन योजना के तहत 18 हजार रुपए की अनुदान राशि मिली। विभाग की ओर से समय-समय पर नि:शुल्क पशु चिकित्सा और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
आर्थिक मदद और विभागीय मार्गदर्शन से विनोद ने बछिया की बेहतर देखभाल की। समय के साथ वह स्वस्थ और अधिक दूध देने वाली गाय के रूप में विकसित हुई।
अब दूध की जरूरत भी पूरी, आमदनी भी
आज विनोद के परिवार को घर के लिए पर्याप्त दूध मिल रहा है। इसके साथ अतिरिक्त दूध से दही और घी तैयार कर स्थानीय स्तर पर बिक्री भी की जा रही है। इससे परिवार को अतिरिक्त आमदनी मिल रही है।
जिस परिवार को कभी दूध के लिए बाजार पर निर्भर रहना पड़ता था, वही परिवार अब खुद दूध उत्पादन कर रहा है। विनोद नुरेटी के लिए नस्ल सुधार और पशुपालन की यह पहल घरेलू जरूरत पूरी करने से आगे बढ़कर परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन गई है।
यह कहानी बताती है कि सही पशुपालन तकनीक, समय पर आर्थिक सहायता और विभागीय मार्गदर्शन मिल जाए तो एक पशु भी ग्रामीण परिवार के लिए स्थायी आजीविका का जरिया बन सकता है।

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