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सेवा संकल्प अभियान: 97 हजार बच्चों ने रंगों और शब्दों में रचा अपने सपनों का भारत

धमतरी के 1,483 स्कूलों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता; किसी ने हरित भारत तो किसी ने तकनीकी रूप से सक्षम देश की तस्वीर खींची रायपुर, 20 स...



धमतरी के 1,483 स्कूलों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता; किसी ने हरित भारत तो किसी ने तकनीकी रूप से सक्षम देश की तस्वीर खींची

रायपुर, 20 सितंबर 2026। धमतरी जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित ‘मेरे सपनों का भारत’ प्रतियोगिता में बच्चों ने रंगों और शब्दों के जरिए देश के भविष्य की तस्वीर उकेरी। विकासखंड स्तर पर हुई दो दिवसीय चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता में 1,483 स्कूलों के 97,754 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

बच्चों की कल्पना में भारत शिक्षित, आत्मनिर्भर, स्वच्छ, हरित और तकनीकी रूप से सक्षम नजर आया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना था।

60 हजार बच्चों ने रंगों से दिखाई भारत की तस्वीर

चित्रकला प्रतियोगिता में 60,608 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कागज और कैनवास पर बच्चों ने आधुनिक शिक्षा, स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण, डिजिटल तकनीक, उन्नत कृषि, महिला सशक्तिकरण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कल्पना को रंगों में उतारा।

कई चित्रों में औद्योगिक और तकनीकी विकास के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिखाई दिया। बच्चों ने अपने चित्रों के जरिए ऐसा भारत दिखाया, जिसमें विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।

37 हजार विद्यार्थियों ने शब्दों में रखा अपना विचार

भाषण प्रतियोगिता में 37,146 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, नागरिक कर्तव्य, विज्ञान और तकनीक के उपयोग तथा सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।

उनके भाषणों में यह सोच प्रमुख रही कि देश का भविष्य केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी से भी तय होता है।

बच्चों के सपनों में दिखा भविष्य का भारत

सेवा संकल्प अभियान से जुड़कर धमतरी के हजारों विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि देश का भविष्य केवल बड़े सपनों से नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए आज किए जा रहे छोटे-छोटे प्रयासों से तैयार होगा।

चित्रों में उभरे रंग और भाषणों में गूंजे विचार आने वाली पीढ़ी की उस सोच को सामने लाते हैं, जिसमें भारत को विकसित, आत्मनिर्भर, पर्यावरण-संवेदनशील और तकनीक के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ता हुआ देखने की आकांक्षा है।


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