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पीएम आवास ने बदली कुम्हार मंशाराम की जिंदगी

कच्चे घर में खराब हो जाते थे मिट्टी के खिलौने और बर्तन, अब पक्की छत के नीचे संवर रहा पुश्तैनी हुनर रायपुर, 2 सितंबर। बालोद जिले के डौण्डी...



कच्चे घर में खराब हो जाते थे मिट्टी के खिलौने और बर्तन, अब पक्की छत के नीचे संवर रहा पुश्तैनी हुनर

रायपुर, 2 सितंबर। बालोद जिले के डौण्डी विकासखंड के वनांचल गांव कुमुड़कट्टा में रहने वाले कुम्हार मंशाराम के लिए पक्का घर कभी सपना था। बरसात आते ही कच्चे मकान की छत टपकती और सीलन से मिट्टी की मूर्तियां, खिलौने और बर्तन खराब हो जाते थे। इससे मेहनत के साथ तैयार किए उत्पादों का नुकसान होता और परिवार की आमदनी भी प्रभावित होती थी। अब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से मिले पक्के मकान ने मंशाराम के परिवार को सुरक्षित छत देने के साथ उनके पुश्तैनी हुनर को भी नया आधार दिया है।

मंशाराम वर्षों से कुम्हारी के साथ कृषि मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं। तीज-त्योहारों के समय मिट्टी की मूर्तियों, खिलौनों और बर्तनों की मांग बढ़ती है, लेकिन यही समय बारिश का भी होता है। ऐसे में कच्चे घर में रखे और तैयार किए जा रहे उत्पाद अक्सर पानी और सीलन से खराब हो जाते थे। उम्र के इस पड़ाव में अपने दम पर पक्का घर बनाना उनके लिए आसान नहीं था।

प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली सहायता राशि और अपनी जमा पूंजी मिलाकर मंशाराम ने अब मजबूत पक्का मकान तैयार कर लिया है। सुरक्षित छत मिलने के बाद वे मौसम की चिंता किए बिना मिट्टी के उत्पाद तैयार कर पा रहे हैं। इससे उनके पारंपरिक काम को निरंतरता मिली है और आमदनी बढ़ाने का रास्ता भी खुला है।

आवास के साथ दूसरी योजनाओं का भी सहारा

मंशाराम के परिवार को शासन की अन्य योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। भूमिहीन होने के कारण उन्हें पं. दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत हर साल 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिल रही है। उनकी पत्नी रामकली को महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने आर्थिक संबल मिल रहा है।

रामकली कहती हैं कि वर्षों तक कच्चे मकान में मुश्किलों के बीच रहकर काम करना पड़ा। अब पक्का घर मिलने से परिवार की जिंदगी आसान हो गई है। उन्होंने कहा, “विष्णु भैया ने पक्का आवास दिया। महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके लिए उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद।”

पक्के आवास, आर्थिक सहायता और नियमित आय के सहारे मंशाराम का परिवार अब पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने पारंपरिक शिल्प को आगे बढ़ा रहा है। सरकारी योजनाओं का यह संगम उनके लिए सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन और बेहतर आजीविका की नई शुरुआत बन गया है।

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