स्व-सहायता समूह के सहयोग से शुरू किया काम, अब हर महीने कमा रही हैं 50 हजार रुपये रायपुर, 7 सितंबर 2026। पारंपरिक कृषि पर निर्भरता से निकल...
स्व-सहायता समूह के सहयोग से शुरू किया काम, अब हर महीने कमा रही हैं 50 हजार रुपये
रायपुर, 7 सितंबर 2026। पारंपरिक कृषि पर निर्भरता से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने वाली ग्रामीण महिलाओं की सूची में अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी का नाम भी जुड़ गया है। अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और शासकीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के बदौलत मिथिला दीदी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बदलने में सफलता हासिल की है।
सीमित आय से आर्थिक मजबूती की ओर
महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही है, उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी हैं। उनके लिए मशरूम उत्पादन की खेती वरदान साबित हुई है। शुरुआत में परिवार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे घर का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण हो रहा था।
इस चुनौती से निपटने के लिए मिथिला दीदी ने अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।
1 लाख 50 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से सफर का आगाज
मशरूम उत्पादन का व्यवसाय शुरू करने के लिए मिथिला दीदी ने सखी क्लस्टर संगठन से 1 लाख 20 हजार रुपये का ऋण लिया, जबकि 30 हजार रुपये अपनी व्यक्तिगत बचत से लगाए। इस प्रकार कुल 1 लाख 50 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से उन्होंने मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया।
शुरुआती दौर में यह काम उनके लिए नया था। तापमान नियंत्रण, विपणन और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई चुनौतियां भी सामने आईं। लेकिन सीखने की ललक और निरंतर प्रयासों के साथ मिथिला दीदी ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और इन चुनौतियों को अवसर में बदल दिया। धीरे-धीरे मशरूम उत्पादन एक सफल आजीविका गतिविधि में बदल गया।
हर माह 50 हजार रुपये की आय, बनीं दूसरी महिलाओं की प्रेरणा
बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन के चलते स्थानीय बाजारों में मिथिला दीदी द्वारा उत्पादित मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी। वर्तमान में वह अपने घर से ही मशरूम का उत्पादन कर स्थानीय बाजार में इसकी बिक्री कर रही हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
मिथिला दीदी की यह सफलता आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उन्होंने साबित किया है कि मेहनत, सही मार्गदर्शन और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए भी आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।
सुशासन नीति और बेहतर मॉनिटरिंग का परिणाम
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन की सतत मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन से सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। इससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
मिथिला नायक दीदी की सफलता इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक तस्वीर है। आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए उनकी कहानी यह संदेश देती है कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकते हैं।


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