उजाला उत्पादक समूह की दीदियों ने सामूहिक खेती से हासिल की नई पहचान, सीधे थोक बिक्री से 6 लाख रुपये की आय रायपुर, 7 सितंबर 2026। पारंपरिक ...
उजाला उत्पादक समूह की दीदियों ने सामूहिक खेती से हासिल की नई पहचान, सीधे थोक बिक्री से 6 लाख रुपये की आय
रायपुर, 7 सितंबर 2026। पारंपरिक खेती से हटकर हरी सब्जियों की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने वाले कई किसानों ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से सफलता की नई कहानियां लिखी हैं। इनमें ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं की सामूहिक खेती की प्रेरणादायक मिसाल भी शामिल है। कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करने वाली ये महिलाएं आज सामूहिक प्रयास और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। छोटे से भूखंड पर टमाटर, बैंगन, लौकी, करेला और खीरा जैसी सब्जियों की आधुनिक तरीके से खेती कर किसान बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। उजाला उत्पादक समूह से जुड़ी 35 महिला किसानों ने एकजुट होकर न केवल खेती की लागत को कम किया, बल्कि 600 क्विंटल सब्जियों का उत्पादन कर करीब 6 लाख रुपये की आय अर्जित की है।
2 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी से मिली नई उड़ान
वर्ष 2025 में गठित इस समूह का उद्देश्य सामूहिक प्रयास के जरिए उत्पादन बढ़ाना और बेहतर बाजार तलाशना था। आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समूह को क्लस्टर से 50 हजार रुपये की स्टार्टअप राशि प्राप्त हुई। इसके साथ ही सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली से 1 लाख 50 हजार रुपये का ऋण लिया गया। इस प्रकार कुल 2 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी से महिलाओं ने अपने खेतों में वैज्ञानिक तकनीक अपनाते हुए लौकी, करेला और खीरा की खेती शुरू की।
600 क्विंटल सब्जियों की बंपर पैदावार
महिलाओं की कड़ी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से खेतों में शानदार उत्पादन हुआ। सब्जी की फसल से बचत बढ़ने लगी तो महिलाओं का हौसला भी बढ़ा। इसके साथ ही उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाना शुरू किया, जिससे पैदावार में लगातार बढ़ोतरी हुई।
महिलाओं ने सामूहिक खेती के जरिए 250 क्विंटल लौकी, 250 क्विंटल करेला और 100 क्विंटल खीरा का उत्पादन किया। इस तरह कुल सब्जी उत्पादन 600 क्विंटल तक पहुंच गया।
बिचौलियों से मुक्ति, सीधे थोक बाजार से जुड़ाव
इस सफलता की सबसे बड़ी कड़ी महिलाओं की बेहतर विपणन रणनीति रही। बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय समूह की दीदियों ने अपनी उपज को सीधे थोक बाजार तक पहुंचाया। इससे उन्हें फसल का उचित दाम मिला और समूह की कुल आय करीब 6 लाख रुपये तक पहुंच गई।
सामूहिक खेती ने न केवल महिलाओं की लागत कम की, बल्कि उन्हें उत्पादन, विपणन और आय के स्तर पर भी मजबूत बनाया। इससे महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने खेती को एक बेहतर आजीविका के रूप में स्थापित किया।
सुशासन और जमीनी मॉनिटरिंग का असर
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘बिहान’ योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा बेहतर क्रियान्वयन, मैदानी मार्गदर्शन और सतत मॉनिटरिंग से योजनाओं का सीधा लाभ हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।
ग्राम पंचायत रिसोरा की 35 महिला किसानों की यह सफलता बताती है कि सामूहिक प्रयास, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर सकती हैं। ‘बिहान’ से जुड़ी इन दीदियों ने मेहनत और एकजुटता के बल पर आत्मनिर्भरता की राह में एक नई मिसाल कायम की है।

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