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बड़ांजी में देसी मुर्गीपालन से महिलाओं को मिलेगा रोजगार, 600 चूजों की ब्रुडिंग शुरू; 25 महिला किसानों को होगा सीधा लाभ

  रायपुर, 25 अगस्त 2026। बस्तर जिले के लोहण्डीगुड़ा विकासखंड के बड़ांजी क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल ...

 



रायपुर, 25 अगस्त 2026। बस्तर जिले के लोहण्डीगुड़ा विकासखंड के बड़ांजी क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है। आजीविका सेवा केंद्र लोहण्डीगुड़ा के अंतर्गत नोडल आईएफसी लक्ष्यदीप महिला क्लस्टर संगठन, बड़ांजी में मुर्गीपालन योजना के प्रथम चरण का शुभारंभ किया गया। इसके तहत ग्राम बड़ांजी की ब्रुडिंग इकाई में 600 देसी मुर्गी के चूजों की वैज्ञानिक ब्रुडिंग शुरू की गई है। योजना से क्षेत्र की 25 चयनित महिला किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।

15 दिनों तक वैज्ञानिक तरीके से होगी देखभाल

ब्रुडिंग इकाई में सभी 600 चूजों को शुरुआती 15 दिनों तक वैज्ञानिक तरीके से रखा जाएगा। इस दौरान उनके लिए उचित तापमान, संतुलित दाना-पानी और आवश्यक टीकाकरण की व्यवस्था की गई है। चूजों की नियमित निगरानी के जरिए उनके बेहतर विकास और मृत्यु दर को न्यूनतम रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ब्रुडिंग प्रक्रिया में आईएफसी एंकर, सीनियर सीआरपी और पशु सखी तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं। इससे महिला किसानों को मुर्गीपालन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी भी मिलेगी, जिससे आगे चूजों की बेहतर देखभाल की जा सकेगी।

हर महिला को मिलेंगे 50-50 चूजे

15 दिनों की वैज्ञानिक ब्रुडिंग पूरी होने के बाद चयनित 25 महिला किसानों को 50-50 स्वस्थ देसी चूजे वितरित किए जाएंगे। इस तरह प्रत्येक महिला अपने घर से ही देसी मुर्गीपालन का व्यवसाय शुरू कर सकेगी।

देसी मुर्गीपालन को कम लागत में शुरू होने वाला स्वरोजगार माना जाता है। चूजों के पालन-पोषण और उनसे प्राप्त उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय महिलाओं के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार हो सकती है।

महिला समूहों के जरिए मजबूत हो रही आजीविका

आईएफसी परियोजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ ही तकनीकी प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

बड़ांजी में शुरू की गई यह पहल महिला सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। देसी मुर्गीपालन के जरिए महिलाओं को घर के स्तर पर ही आय का अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध होने की उम्मीद है।

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