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कोरबा का हाथी प्रबंधन मॉडल बना देश के लिए मिसाल, तकनीक और जनभागीदारी से घटा मानव-हाथी संघर्ष

गजसंकेत ऐप, रियल टाइम अलर्ट और हाथी मित्र दलों से बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा रायपुर, 30 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला मानव-हाथी द्वं...



गजसंकेत ऐप, रियल टाइम अलर्ट और हाथी मित्र दलों से बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा

रायपुर, 30 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला मानव-हाथी द्वंद प्रबंधन के क्षेत्र में एक नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। यहां वन संरक्षण, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से हाथियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के साथ ही ग्रामीणों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और कटघोरा वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत के नेतृत्व में जिला प्रशासन और वन विभाग ने ऐसा समन्वित तंत्र विकसित किया है, जिसमें तकनीक के उपयोग से हाथियों की गतिविधियों की निगरानी और ग्रामीणों को समय पर सूचना पहुंचाई जा रही है।

कोरबा जिले में स्थित लेमरू हाथी रिजर्व करीब 1 लाख 99 हजार 548 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। इसमें कटघोरा, कोरबा, धरमजयगढ़ और सरगुजा वनमंडलों के 11 वन परिक्षेत्र शामिल हैं। यहां हाथियों के प्राकृतिक आवास और पारंपरिक विचरण मार्गों की वैज्ञानिक पहचान कर उनके संरक्षण पर काम किया जा रहा है।

तकनीक बनी सुरक्षा का आधार

कोरबा मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल है। वन विभाग द्वारा 24 घंटे सक्रिय हाथी नियंत्रण केंद्र, टोल फ्री हेल्पलाइन, थर्मल ड्रोन, गजसंकेत मोबाइल ऐप, सीसीटीवी निगरानी और प्रशिक्षित हाथी मित्र दलों के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

गांवों तक हाथियों की वास्तविक समय की जानकारी पहुंचाई जाती है, जिससे ग्रामीण समय रहते सतर्क होकर सुरक्षित स्थानों पर जा सकें। सितंबर 2023 से जून 2026 तक गजसंकेत ऐप पर 1,097 हाथी मूवमेंट दर्ज किए गए, जबकि 2 लाख 68 हजार 782 से अधिक अलर्ट प्रभावित ग्रामीणों तक पहुंचाए गए।

जनहानि और नुकसान में आई कमी

मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां हाथियों के कारण 9 लोगों की मृत्यु हुई थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 3 रह गई। इसके अलावा वर्ष 2024-25 और 2025-26 में मानव घायल होने के मामले शून्य दर्ज किए गए हैं।

इसी तरह मकानों को होने वाली क्षति में भी कमी आई है। वर्ष 2020-21 में 513 मकान प्रभावित हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 33 रह गई।

ग्रामीणों की आजीविका पर भी ध्यान

वन विभाग ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। किसान वृक्ष मित्र योजना, लाख उत्पादन, दोना-पत्तल निर्माण, महुआ एवं कोदो प्रसंस्करण, अगरबत्ती निर्माण, सिलाई कार्य और इको-टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन प्रयासों से ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ ही वन संरक्षण में उनकी भागीदारी भी मजबूत हो रही है।

ऑनलाइन मुआवजा व्यवस्था से मिलेगी तेजी

मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित लोगों को जल्द राहत देने के लिए ऑनलाइन मुआवजा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है। इसके तहत जनहानि, पशुहानि, फसल और संपत्ति नुकसान के मामलों का ऑनलाइन पंजीयन, डिजिटल सत्यापन, आवेदन की ट्रैकिंग और समयबद्ध निराकरण संभव होगा।

कोरबा का यह मॉडल साबित कर रहा है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और सामुदायिक सहयोग से मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है। आने वाले समय में डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन व्यवस्थाएं इस मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाएंगी।

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