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तत्काल में सेंध, दलाली का धंधा बेनकाब: बिलासपुर से प्रयागराज तक फैला टिकट नेटवर्क ध्वस्त

abernews बिलासपुर। त्योहार और गर्मी की छुट्टियों में कन्फर्म बर्थ की जद्दोजहद के बीच रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) ने आरक्षित टिकट दलाली के एक संग...




abernews बिलासपुर। त्योहार और गर्मी की छुट्टियों में कन्फर्म बर्थ की जद्दोजहद के बीच रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) ने आरक्षित टिकट दलाली के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। Railway Protection Force की अपराध गुप्तचर शाखा ने बिलासपुर में दबिश देकर दो कथित दलालों को गिरफ्तार किया और 47 आरक्षित काउंटर टिकट जब्त किए। जांच में खुलासा हुआ कि यहां से बनाए गए टिकट भदोही-प्रयागराज भेजे जाते थे, जहां आगे उनकी सप्लाई की जाती थी।

आरपीएफ के अनुसार कार्रवाई तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान की गई। रेलवे आरक्षण केंद्र और हाई कोर्ट आवासीय परिसर, बोदरी स्थित पीआरएस कार्यालय पर एक साथ छापेमारी की गई। टीम को पहले से इनपुट था कि तत्काल कोटे में बड़े पैमाने पर टिकट लेकर उन्हें बाहर भेजा जा रहा है। औचक जांच में जांजगीर-चांपा जिले के अमलीपाली निवासी रामचरण मन्नेवर को हाई कोर्ट आवासीय परिसर स्थित पीआरएस से पकड़ा गया, जबकि वायरलेस कॉलोनी निवासी शुभम रजक को रेलवे परिक्षेत्र स्थित पीआरएस से गिरफ्तार किया गया।

1.64 लाख के 47 टिकट जब्त


दोनों आरोपितों के कब्जे से आगामी दिनों के दो टिकट सहित कुल 47 रेलवे आरक्षित काउंटर टिकट बरामद किए गए। जब्त टिकटों की कुल कीमत करीब 1 लाख 64 हजार रुपये आंकी गई है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बिलासपुर से टिकट बनाकर उन्हें ट्रेन या बस के जरिए प्रयागराज भेजते थे। वहां रविंदर कुमार नामक व्यक्ति के माध्यम से यात्रियों को ऊंचे दाम पर उपलब्ध कराया जाता था।

आरपीएफ ने आरोपितों के खिलाफ Railways Act, 1989 की धारा 143 के तहत मामला दर्ज किया है, जो रेलवे टिकटों की अवैध खरीद-फरोख्त और दलाली पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान करती है। रविंदर कुमार और अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश जारी है।

हर टिकट पर 200-300 रुपये कमीशन

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय थे। प्रत्येक यात्री से 200 से 300 रुपये तक अतिरिक्त कमीशन वसूला जाता था। त्योहार और ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान इस नेटवर्क की गतिविधियां बढ़ जाती थीं, जिससे आम यात्रियों को कन्फर्म बर्थ पाने में परेशानी उठानी पड़ती थी।

आरपीएफ अधिकारियों के मुताबिक, टिकट दलाली के कारण वास्तविक जरूरतमंद यात्रियों को समय पर आरक्षित टिकट नहीं मिल पाते। मजबूरी में उन्हें अधिक भुगतान करना पड़ता है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से आरक्षण केंद्रों की निगरानी बढ़ाई गई थी और मुखबिर तंत्र को सक्रिय रखा गया था।

त्योहारी सीजन में बढ़ती है दलाली


रेलवे सूत्रों का कहना है कि त्योहारी सीजन और स्कूलों की छुट्टियों में तत्काल कोटे पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे समय में संगठित दलाल नेटवर्क सक्रिय होकर बड़ी संख्या में टिकट हासिल कर लेते हैं और बाद में ऊंचे दाम पर बेचते हैं। बिलासपुर से प्रयागराज तक फैले इस नेटवर्क का खुलासा इसी कड़ी निगरानी का परिणाम है।

जांच जारी, नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की तैयारी

आरपीएफ ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई प्रारंभिक है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जाएगी। वित्तीय लेन-देन, संपर्क सूत्रों और टिकट बुकिंग के पैटर्न की पड़ताल की जा रही है। जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी समन्वय किया जाएगा।

अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल दें। साथ ही, अधिकृत काउंटर और आधिकारिक माध्यमों से ही टिकट लेने की सलाह दी गई है। आरपीएफ का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आरोपितों पर रेलवे अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आरपीएफ की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल दलाली के एक बड़े जाल को उजागर किया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि आरक्षण व्यवस्था में सेंध लगाने वालों पर कड़ी नजर है। यात्रियों की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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