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मैट्स यूनिवर्सिटी: बचपन बचाओ अभियान: स्कूली बच्चों को बताए बाल अधिकार और सुरक्षा के कानूनी प्रावधान

MATS विश्वविद्यालय के विधि एवं सामाजिक कार्य विभाग की पहल, तीन स्कूलों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को किया जागरूक रायपुर। बच...



MATS विश्वविद्यालय के विधि एवं सामाजिक कार्य विभाग की पहल, तीन स्कूलों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को किया जागरूक

रायपुर। बच्चों को सुरक्षित बचपन, सम्मान और शोषणमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रव्यापी ‘बचपन बचाओ अभियान’ में MATS विश्वविद्यालय रायपुर ने सक्रिय सहभागिता निभाई। विश्वविद्यालय के विधि विभाग एवं सामाजिक कार्य विभाग के विद्यार्थियों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), रायपुर एवं दुर्ग के सहयोग से विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और उनकी कानूनी सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।

तीन स्कूलों में चलाया जागरूकता अभियान

अभियान के तहत विश्वविद्यालय की टीम ने GD Goenka International School, सेजबहार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मर्रा (तहसील पाटन, जिला दुर्ग) तथा स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल का दौरा किया। यहां कक्षा छठवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, व्यक्तिगत अधिकारों और शोषण से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

POCSO अधिनियम और सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श की जानकारी

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 के प्रमुख प्रावधानों से परिचित कराया गया। सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, व्यक्तिगत सुरक्षा, बाल अधिकारों और बाल शोषण की रोकथाम के बारे में बताया गया। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि किसी भी अनुचित व्यवहार या अप्रिय घटना की स्थिति में चुप रहने के बजाय किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सहायता प्राप्त करें।

न्यायिक अधिकारियों और विधिक सेवा प्रतिनिधियों की सहभागिता

इस अभियान में रायपुर एवं दुर्ग के न्यायिक अधिकारियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें संभावित शोषण और अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए सक्षम बनाना रहा।



विश्वविद्यालय प्रबंधन का मिला मार्गदर्शन

इस पहल को सफल बनाने में MATS विश्वविद्यालय के चांसलर गजराज पगारिया, डायरेक्टर जनरल प्रियांश पगारिया, कुलपति प्रो. (डॉ.) के.पी. यादव, रजिस्ट्रार गोकुलनन्द पंडा एवं डिप्टी रजिस्ट्रार का मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग रहा।

कार्यक्रम का नेतृत्व विधि विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पायल चटर्जी एवं सामाजिक कार्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना आर. तुपट के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें डॉ. आई. नागमणि देशलहरे, श्री ओम प्रकाश कनौजिया एवं डॉ. स्नेह कुमारी का विशेष योगदान रहा।

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस अभियान में सहयोग देने के लिए DLSA, न्यायिक अधिकारियों, विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों एवं पैरालीगल वॉलंटियर्स (PLVs) के प्रति आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय ने बच्चों के अधिकारों के संरक्षण और सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए ऐसी सामाजिक एवं विधिक जागरूकता पहलों को महत्वपूर्ण बताया।

अभियान का मूल संदेश यही रहा कि हर बच्चे को सुरक्षित बचपन, सम्मान और भयमुक्त जीवन का अधिकार है।


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