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केके रेललाइन पर भूस्खलन से ब्रेक, 35 दिन में 411 करोड़ के माल परिवहन पर असर!

 जगदलपुर19 Oct 2026,. छत्तीसगढ़ में मानसून सीजन में लगातार हुई बारिश से आई बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई. जनजीवन प्रभावित होने के बीच बस्तर की लाइ...



 जगदलपुर19 Oct 2026,. छत्तीसगढ़ में मानसून सीजन में लगातार हुई बारिश से आई बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई. जनजीवन प्रभावित होने के बीच बस्तर की लाइफलाइन केके रेललाइन पर भूस्खलन से रेल यातायात को बुरी तरह प्रभावित हुआ. 24 सितंबर को मल्लीगुड़ा और छत्रिपुत के बीच हुए भूस्खलन के बाद पहले 22 अक्टूबर तक रेल परिचालन बहाल होने की उम्मीद थी. हालांकि अब रेलवे ने इसकी समयसीमा बढ़ाकर 28 अक्टूबर कर दी है. ऐसे में बस्तर की रेल कनेक्टिविटी सामान्य होने का इंतजार और लंबा हो गया है.

35 दिनों में 411 करोड़ रुपये के माल परिवहन का अनुमान

केके रेललाइन बस्तर के औद्योगिक और माल परिवहन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इस मार्ग पर लोकल और विशाखापट्टनम रूट को मिलाकर प्रतिदिन करीब 36 मालगाड़ियों की आवाजाही होती है. भूस्खलन के कारण इस रेलमार्ग पर परिचालन प्रभावित होने से माल परिवहन पर भी असर पड़ रहा है.



जानकारी के मुताबिक, किरंदुल और बचेली साइडिंग से निकलने वाली 18 मालगाड़ियों का प्रति ट्रेन किराया करीब 60 लाख रुपये बताया गया है. वहीं, नगरनार से विशाखापट्टनम जाने वाली मालगाड़ी का किराया लगभग 50 लाख रुपये और आरापुर से जाने वाली मालगाड़ी का किराया करीब 45 लाख रुपये बताया गया है.


इन आंकड़ों के आधार पर 28 अक्टूबर तक के 35 दिनों में करीब 411 करोड़ रुपये के माल परिवहन का अनुमान लगाया गया है. हालांकि, यह राशि अनुमानित परिवहन मूल्य के आधार पर निकाली गई है. इसे रेलवे को होने वाला वास्तविक नुकसान या राजस्व की हानि नहीं माना जा सकता. वास्तविक आर्थिक प्रभाव परिचालन की स्थिति और प्रभावित मालगाड़ियों की संख्या पर निर्भर करेगा.


बार-बार भूस्खलन से रेल कनेक्टिविटी पर संकट


बस्तर के केके रेललाइन पर भूस्खलन की घटनाएं रेल परिचालन के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं. पहाड़ी और संवेदनशील हिस्सों में ऐसी घटनाओं के कारण ट्रेनों की आवाजाही बाधित होने से बस्तर के औद्योगिक परिवहन पर असर पड़ता है. इस रेलमार्ग के जरिए खनिज और अन्य माल को विभिन्न औद्योगिक केंद्रों तक पहुंचाया जाता है.

स्थायी समाधान की जरूरत

रेल परिचालन बहाल करने की समयसीमा बढ़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल पहाड़ी हिस्सों की सुरक्षा को लेकर है. बार-बार होने वाले भूस्खलन से बचाव के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा उपाय, पहाड़ी ढलानों की मजबूती और प्रभावी निगरानी जरूरी है.


फिलहाल, रेल परिचालन बहाली की नई समयसीमा 28 अक्टूबर तय की गई है. अब देखना होगा कि रेलवे निर्धारित समय तक ट्रेनों की आवाजाही बहाल कर पाता है या नहीं. साथ ही बस्तर की लाइफलाइन मानी जाने वाली इस रेललाइन को भविष्य में भूस्खलन से सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.

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