श्री बिरंचीनारायण मंदिर एवं नरसिंहनाथ मंदिर ट्रस्ट की जमीन का नामांतरण निरस्त, दोषियों पर होगी एफआईआर रायपुर, 2 october। पंजीयक, सार्वजनिक...
श्री बिरंचीनारायण मंदिर एवं नरसिंहनाथ मंदिर ट्रस्ट की जमीन का नामांतरण निरस्त, दोषियों पर होगी एफआईआर
रायपुर, 2 october। पंजीयक, सार्वजनिक न्यास एवं एसडीएम ने कलेक्टर की अनुमति के बिना पुरानी बस्ती स्थित श्री बिरंचीनारायण मंदिर एवं नरसिंहनाथ मंदिर ट्रस्ट की जमीन की बिक्री को अवैध ठहराते हुए नामांतरण निरस्त करने का आदेश दिया। साथ ही दोषियों के खिलाफ एफआईआर के भी आदेश पारित किए। बताया जाता है कि आवेदक पंकज विश्वकर्मा ने प्राचीन बिरंचीनारायण मंदिर एवं नरसिंहनाथ मंदिर के स्वामित्व की धरमपुरा में 0.158 हेक्टेयर जमीन की अवैध खरीदी-बिक्री पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से शिकायत की थी। सीएम ने रायपुर कलेक्टर को जांच के लिए लिखा था। मंदिर सार्वजनिक न्यास के स्वामित्व की जमीन को ट्रस्ट्री अजय तिवारी के साथ मिलकर कलेक्टर और पंजीयक सार्वजनिक न्यास की अनुमति के बिना बिक्री की गई। इस पूरे मामले एसडीएम कोर्ट ने प्रकरण दर्ज कर आदेश पारित किए। एसडीएम कार्ट ने 29 सितंबर 2026 को जारी आदेश में ग्राम धरमपुरा स्थित खसरा नंबर 293/7, रकबा 0.158 हेक्टेयर की जमीन के विक्रय को विधि विरुद्ध माना गया है। कोर्ट ने जमीन के नामांतरण को निरस्त कर ट्रस्ट के नाम पर राजस्व अभिलेख दुरुस्त करने, विक्रय विलेख को शून्य कराने के लिए सक्षम सिविल न्यायालय में कार्रवाई करने और संबंधित थाना प्रभारी को दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिकायत में बताया गया कि ट्रस्ट की बैठक में जमीन को 21 लाख रुपए में सौरभ जैन और निखिल जैन के नाम से खरीदने का प्रस्ताव लिया गया था, लेकिन 1 दिसंबर 2022 को इसकी रजिस्ट्री घनश्याम दानी के नाम कराई गई। बाद में 24 अप्रैल 2024 को घनश्याम दानी ने जमीन दशमेश फार्म एंड विला के पार्टनर विवेक अग्रवाल को बेच दी। जमीन का बाजार मूल्य वर्ष 2022 में 2.50 करोड़ रुपए से अधिक होने का भी दावा किया गया था। मामले की जांच में अतिरिक्त तहसीलदार रायपुर की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार राजस्व अभिलेख में जमीन का नाम बिरंचीनारायण स्वामी सर्वराकार महंत देवदास वैष्णव द्वारा प्रबंधक कलेक्टर, रायपुर के नाम दर्ज किए जाने के निर्देश थे। अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि नामांतरण के दौरान अभिलेख में से प्रबंधक कलेक्टर, रायपुर शब्द हटा दिए गए और केवल महंत का नाम दर्ज किया गया। एसडीएम ने छत्तीसगढ़ लोक न्यास अधिनियम, 1951 की धारा 14 का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक न्यास की अचल संपत्ति के विक्रय के लिए निर्धारित वैधानिक अनुमति आवश्यक है। संबंधित जमीन के विक्रय के लिए पंजीयक, सार्वजनिक न्यास अथवा सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। कोर्ट ने इस सिलसिले में हाईकोर्ट के 18 नवंबर 2023 के आदेश का भी उल्लेख किया। आदेश में खसरा नंबर 293/7 पर घनश्याम दानी के नाम दर्ज नामांतरण को विलोपित कर जमीन को पूर्व निर्धारित ट्रस्ट संबंधी नाम से राजस्व अभिलेख में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही विक्रय विलेख को शून्य कराने के लिए सक्षम सिविल न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करने और संबंधित थाना प्रभारी को बीएनएस तथा लोक न्यास अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई करने कहा गया है। एसडीएम कोर्ट ने ट्रस्ट की ओर से बताई गई तकनीकी चूक की दलील को स्वीकार नहीं किया और कार्रवाई को लोक न्यास के हितों के प्रतिकूल बताते हुए विधि विरुद्ध माना है।
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