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विशेष लेख: शिक्षा से समृद्धि: गांवों तक पहुंची उच्च शिक्षा, बदल रही छत्तीसगढ़ के युवाओं की तस्वीर

सेवा संकल्प अभियान  नए कॉलेज, आधुनिक प्रयोगशालाएं और डिजिटल क्लासरूम से बदला उच्च शिक्षा का स्वरूप; एनईपी-2020 से बहुविषयक और रोजगारपरक शिक...



सेवा संकल्प अभियान 

नए कॉलेज, आधुनिक प्रयोगशालाएं और डिजिटल क्लासरूम से बदला उच्च शिक्षा का स्वरूप; एनईपी-2020 से बहुविषयक और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर

विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक

रायपुर, 23 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा का दायरा अब शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में नए शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना, पुराने संस्थानों में नए विषयों और संकायों का विस्तार तथा आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के विकास से प्रदेश के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़े हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत शिक्षा को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने उच्च शिक्षा के परिदृश्य में बदलाव की नई तस्वीर पेश की है।

गांवों तक पहुंच रहे कॉलेज और नए पाठ्यक्रम

क्षेत्रीय असंतुलन कम करने के लिए वनांचल और ग्रामीण इलाकों में नए शासकीय महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। पहले से संचालित संस्थानों में भी नए संकाय, विषय और अध्ययन सीटें बढ़ाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के आसपास ही उच्च शिक्षा के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है।

इसके साथ ही पुराने भवनों के कायाकल्प और नए परिसरों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है। प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और ई-क्लासरूम जैसी सुविधाओं के विस्तार से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ प्रयोगात्मक और डिजिटल ज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

एनईपी-2020 से बदली पढ़ाई की दिशा

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का चरणबद्ध क्रियान्वयन किया जा रहा है। जुलाई 2024 से शासकीय और निजी महाविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में एनईपी लागू की गई। वर्ष 2025 से पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर और इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में भी इसे लागू किया गया।

सत्र 2025-26 से चार वर्षीय बीएड, प्राच्य संस्कृत और बीपीएड जैसे व्यावसायिक एवं विशिष्ट पाठ्यक्रमों को भी एनईपी के दायरे में लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इससे विद्यार्थियों को बहुविषयक और व्यावहारिक शिक्षा के अवसर मिलने की उम्मीद है।

डिग्री के साथ जीवन कौशल पर भी जोर

उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री तक सीमित न रहे, इसके लिए विद्यार्थियों के करियर, मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा संबंधी तनाव जैसे विषयों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। महाविद्यालयों में करियर एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ स्थापित किए जा रहे हैं, जहां विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों की मदद से विद्यार्थियों को काउंसलिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर करने के लिए नए पदों के सृजन और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के माध्यम से नैक मूल्यांकन को प्रोत्साहित करने पर भी जोर है।

पढ़ाई के साथ खेल और नेतृत्व का विकास

महाविद्यालयों के अकादमिक कैलेंडर में खेलकूद, एनएसएस, एनसीसी और योग जैसी गतिविधियों को शामिल किया जा रहा है। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

डिजिटल सुविधाओं से ग्रामीण विद्यार्थी भी वैश्विक ज्ञान से जुड़ रहे

आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल कनेक्टिविटी उच्च शिक्षा में बदलाव के महत्वपूर्ण आधार बन रहे हैं। ई-क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाओं और डिजिटल संसाधनों से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी व्यापक ज्ञान-संसाधनों तक पहुंच बना रहे हैं।

उच्च शिक्षा में इंफ्रास्ट्रक्चर, नई शिक्षा नीति, डिजिटल सुविधाओं और कौशल विकास को साथ लेकर चलने का प्रयास युवाओं के लिए शिक्षा को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत शिक्षा को व्यापक पहुंच देने की यह पहल आने वाले समय में प्रदेश के युवाओं को नए अवसरों से जोड़ने का आधार तैयार कर सकती है।


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