वैज्ञानिक रेशम पालन से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर 100 कृषकों ने लिया भाग, ‘सिल्क-समग्र’ योजना और आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का आह्वान रायप...
वैज्ञानिक रेशम पालन से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
100 कृषकों ने लिया भाग, ‘सिल्क-समग्र’ योजना और आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का आह्वान
रायपुर, 02 सितंबर 2026। रेशम विभाग रायपुर एवं केंद्रीय रेशम बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में उपसंचालक कार्यालय रायपुर में ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय शहतूत रेशम कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन बढ़ाना और उनकी आय में वृद्धि करना रहा। सम्मेलन में रायपुर जिले से 20, धमतरी से 40, दुर्ग से 10 तथा महासमुंद जिले से 30 कृषकों सहित कुल 100 कृषकों ने भाग लिया।
सम्मेलन की प्रमुख बातें
आर्थिक आत्मनिर्भरता और ‘सिल्क-समग्र’ योजना
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश राणा ने रेशम पालन को किसानों की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बताया। उन्होंने किसानों से ‘सिल्क-समग्र’ योजना का अधिकतम लाभ उठाने और रेशम पालन को व्यावसायिक स्तर पर अपनाने का आग्रह किया।
तकनीकी अंतर कम करने की पहल
बीटीएसएसओ (BTSSO) बिलासपुर की निदेशक डॉ. पुनीतावती ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच की दूरी को कम करना है। उन्होंने बाई-वोल्टाइन क्रॉप और शहतूत की उन्नत खेती के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के अवसरों पर प्रकाश डाला।
वैज्ञानिक देखरेख और रोग प्रबंधन
वैज्ञानिक बी. कुमारी रंजीता बाई एच. और तकनीकी विशेषज्ञ श्री अरविंद मसराम ने रेशम कीटों की पांचों अवस्थाओं, पत्ती प्रबंधन, रियरिंग हाउस की स्वच्छता, प्रभावी कीटाणुशोधन तथा मोल्टिंग-माउंटिंग से जुड़ी तकनीकी जानकारियां साझा कीं।
संयुक्त संचालक श्री सी.एस. नोनहारे और उप संचालक श्री ठाकुर राम उइके ने सेरीकल्चर को किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर जरिया बताते हुए रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में संचालित विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।

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