——

Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

- Advertisement - Ads " alt="" />" alt="" />

विशेष लेख: छत्तीसगढ़ में गति पकड़ता राजस्व न्याय

रिकॉर्ड 81.35 प्रतिशत प्रकरणों के निपटारे से राजस्व अदालतों में आई तेजी, प्रशासनिक इच्छाशक्ति से आमजन को सीधी राहत विष्णु प्रसाद वर्मा सह...



रिकॉर्ड 81.35 प्रतिशत प्रकरणों के निपटारे से राजस्व अदालतों में आई तेजी, प्रशासनिक इच्छाशक्ति से आमजन को सीधी राहत

विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक

रायपुर, 24 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने की दिशा में राजस्व न्यायालयों के प्रदर्शन ने नई गति पकड़ी है। दूरस्थ अंचलों से लेकर बड़े शहरों तक भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व से जुड़े मामलों के समयबद्ध निराकरण को प्रशासनिक प्राथमिकता दी गई है। इसका असर राजस्व न्यायालयों के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है।

राज्यभर के राजस्व न्यायालयों में दर्ज कुल 4,67,415 प्रकरणों में से 3,80,224 का निराकरण किया जा चुका है। इस तरह प्रदेश में मामलों के निपटारे की दर 81.35 प्रतिशत पहुंच गई है। अब 87,191 प्रकरण लंबित हैं, जिनके समाधान के लिए लक्षित और व्यवस्थित प्रयास जारी हैं।

कोर्ट-कचहरी के चक्करों से राहत, समय और धन की बचत

राजस्व मामलों का शीघ्र निराकरण महज आंकड़ों की उपलब्धि नहीं है। जमीन और आजीविका से जुड़े मामलों में फैसला समय पर होने से नागरिकों को लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया और बार-बार कार्यालयों व अदालतों के चक्कर लगाने से राहत मिलती है। इससे लोगों के समय और संसाधनों की बचत के साथ राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित कार्यप्रणाली भी मजबूत हो रही है।

दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन

राजस्व न्याय की इस तेज गति में दूरस्थ और आदिवासी बहुल जिलों का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सुकमा 92.70 प्रतिशत निराकरण दर के साथ प्रदेश में सबसे आगे है। यहां दर्ज 7,224 प्रकरणों में से 6,697 का निपटारा किया जा चुका है।

इसी तरह नारायणपुर में 92.28 प्रतिशत (5,780 में से 5,334), दंतेवाड़ा में 91.50 प्रतिशत (5,614 में से 5,137) और बीजापुर में 89.67 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण हुआ है। भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद इन जिलों में हासिल प्रगति त्वरित राजस्व न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।

बड़े जिलों में भी तेजी से सुलझ रहे जमीन-जायदाद के मामले

अधिक प्रकरण भार वाले जिलों में भी राजस्व मामलों के निराकरण की गति बनी हुई है। बस्तर में 17,600 में से 15,745, बलौदाबाजार-भाटापारा में 20,905 में से 18,494, रायपुर में 34,226 में से 29,824, बिलासपुर में 29,495 में से 24,539, जांजगीर-चांपा में 19,132 में से 16,109 और कोरबा में 19,705 में से 15,747 प्रकरणों का निपटारा किया जा चुका है।

ई-धरती और आधुनिक सर्वेक्षण से मजबूत हो रहे भू-अभिलेख

राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के साथ भू-अभिलेखों को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाने पर भी काम किया जा रहा है। ‘ई-धरती’ योजना और आधुनिक भू-सर्वेक्षण तकनीकों के जरिए राज्य के असर्वेक्षित क्षेत्रों को राजस्व रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

राज्य में 431 वन ग्राम से परिवर्तित राजस्व ग्राम और 596 असर्वेक्षित या मसाहती ग्राम, कुल 1,027 ग्रामों का सर्वेक्षण के लिए चिन्हांकन किया गया है। इनमें से 284 ग्रामों का सर्वेक्षण पूरा कर डाटा ‘भुइयां पोर्टल’ पर अपलोड किया जा चुका है, जबकि 196 ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया जारी है।

अबूझमाड़ में ऐतिहासिक पहल, डिजिटल नक्शों का निर्माण

अति-संवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र और नारायणपुर जिले में ग्राम सर्वेक्षण की शुरुआत राजस्व अभिलेखों को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यहां 6 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन पूरा कर अभिलेख और नक्शे ‘भुइयां’ तथा ‘भू-नक्शा’ सॉफ्टवेयर पर अपलोड किए जा चुके हैं। वहीं 59 अन्य ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया चल रही है।

ई-धरती योजना के तहत बंदोबस्त संबंधी त्रुटियों के सुधार के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कोंडागांव जिले को 1.10 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है।

नगरीय निकायों के कैडेस्ट्रल नक्शों को 1:500 के सूक्ष्म पैमाने पर तैयार करने की दिशा में भी काम जारी है। इसके तहत 22 जिलों के 396 गांवों को नए पैमाने के नक्शे उपलब्ध कराए जा चुके हैं। नजूल और परिवर्तित अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का काम भी अंतिम चरण में है। वर्ष 2025-26 के पात्र हितग्राहियों के सत्यापन और ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी जारी है।

पुराने लंबित मामलों के लिए वैज्ञानिक रणनीति

लंबित 87,191 प्रकरणों का समयावधि के आधार पर वर्गीकरण किया गया है, ताकि पुराने मामलों को प्राथमिकता के साथ निपटाया जा सके।

इनमें 0 से 6 माह के 51,401, 6 माह से 1 वर्ष के 13,218, 1 से 3 वर्ष के 15,918, 3 से 5 वर्ष के 3,903 और 5 वर्ष से अधिक पुराने 2,751 प्रकरण शामिल हैं।

इस वर्गीकरण का उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों को अलग से चिन्हित कर उनके निराकरण पर विशेष ध्यान देना है, ताकि लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का समाधान हो सके।

कई जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक निराकरण दर

प्रदेश के कई अन्य जिलों ने भी 80 प्रतिशत से अधिक निराकरण दर हासिल की है। इनमें राजनांदगांव 83.45 प्रतिशत, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई 83.42, कोरिया 81.87, सारंगढ़-बिलाईगढ़ 81.84, धमतरी 81.65, बेमेतरा 81, जशपुर 80.67, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 80.38, कबीरधाम 80.23 और कांकेर 80.21 प्रतिशत शामिल हैं।

सरगुजा, महासमुंद, रायगढ़, सूरजपुर, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे जिलों में भी निरंतर समीक्षा बैठकों, डिजिटल ट्रैकिंग और समयबद्ध सुनवाई के माध्यम से प्रकरणों के निराकरण को गति दी जा रही है।

पारदर्शी और त्वरित सुशासन की ओर कदम

राजस्व न्यायालयों में 81.35 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण, लंबित मामलों का वैज्ञानिक वर्गीकरण, आधुनिक सर्वेक्षण और भू-अभिलेखों का डिजिटाइजेशन—ये सभी प्रयास राजस्व व्यवस्था में हो रहे बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं।

डिजिटल गवर्नेंस, आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक और नियमित मॉनिटरिंग के समन्वय से छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को अधिक त्वरित, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। जमीन से जुड़े मामलों में समय पर निर्णय और सटीक अभिलेख आम नागरिकों को सीधी राहत देने के साथ सुशासन की नींव को भी मजबूत करते हैं।


No comments