गृहग्राम बीरपुर में ग्रामीणों के साथ की करम देव की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना रायपुर, 23 सितंबर 2026। महिला एवं बाल विकास...
गृहग्राम बीरपुर में ग्रामीणों के साथ की करम देव की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना
रायपुर, 23 सितंबर 2026। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपने गृहग्राम बीरपुर में आयोजित करमा पूजा में शामिल हुईं। उन्होंने ग्रामीणों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान से करम देव की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख, शांति, खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की।
करमा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और जनजीवन से जुड़ा प्रमुख पारंपरिक पर्व है। यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, लोक आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक माना जाता है। करम देव की पूजा के साथ ग्रामीण अच्छी फसल, परिवार की खुशहाली और समाज की समृद्धि की कामना करते हैं। पर्व के दौरान पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और रीति-रिवाजों से गांव का माहौल उल्लास से भर गया।
लोकपरंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, तीज-त्योहारों और प्रकृति से जुड़े पर्वों से है। करमा जैसे लोकपर्व हमें अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। इनमें प्रकृति के प्रति सम्मान, आपसी भाईचारे और सामूहिकता की भावना दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि लोकसंस्कृति और परंपराएं केवल उत्सव का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। इन्हें जीवंत बनाए रखना और नई पीढ़ी को इनकी महत्ता से परिचित कराना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं और बच्चों से लोकसंस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक पर्वों से जुड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने मंत्री का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर करमा पूजा की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र एवं प्रदेश की निरंतर प्रगति के साथ सभी परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की।

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