हर महीने 2.22 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ; पढ़ाई-पोषण से लेकर बचत और स्वरोजगार तक में हो रहा उपयोग रायपुर, 29 सितंबर 2026। महतारी वंदन योज...
हर महीने 2.22 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ; पढ़ाई-पोषण से लेकर बचत और स्वरोजगार तक में हो रहा उपयोग
रायपुर, 29 सितंबर 2026। महतारी वंदन योजना जशपुर जिले की महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहारे का जरिया बन रही है। मार्च 2024 से अगस्त 2026 तक जिले की महिलाओं के खातों में योजना के तहत 639 करोड़ 54 लाख 55 हजार 550 रुपये अंतरित किए जा चुके हैं। हर महीने औसतन 2 लाख 22 हजार से अधिक महिलाएं योजना का लाभ ले रही हैं।
योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की सहायता मिलती है। महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, पोषण, घरेलू जरूरतों के साथ बचत और स्वरोजगार में कर रही हैं। किसी परिवार में यह राशि बच्चों की कॉपी-किताब और पोषण का सहारा बन रही है, तो कहीं इसी से बेटी के भविष्य के लिए बचत की जा रही है।
बच्चों की पढ़ाई के साथ बचत पर भी जोर
देवगुड़ा की परमिला प्रजापति बताती हैं कि महतारी वंदन से मिलने वाली राशि से बच्चे की पढ़ाई और पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। नियमित राशि से घरेलू खर्च को व्यवस्थित करने में भी सहूलियत होती है।
पुरनानगर की एनीमा खलखो योजना की राशि से बच्चे की पढ़ाई-पोषण और घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ हर महीने 500 रुपये बचा रही हैं। उनके लिए यह राशि वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य के लिए आर्थिक आधार तैयार करने का माध्यम भी बन रही है।
बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या में निवेश
योजना की राशि को कई महिलाएं दीर्घकालीन बचत से जोड़ रही हैं। तपकरा क्षेत्र के बाधरकोना की विनीता बघेल और जशपुर की पार्वती सिंह अपनी बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर रही हैं। उनका लक्ष्य छोटी-छोटी बचत के जरिए बेटियों की उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक आधार तैयार करना है।
महिलाओं को आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने में महतारी शक्ति ऋण योजना भी मददगार बन रही है। पात्र महिलाओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार 25 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार शुरू या आगे बढ़ा सकें।
सिलाई और छोटे कारोबार से बढ़ी आत्मनिर्भरता
जशपुर की ममता यादव सिलाई का काम करती हैं। उनका कहना है कि सिलाई से होने वाली आय के साथ महतारी वंदन की राशि परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों के भविष्य के लिए बचत में मदद कर रही है।
इसी तरह सरिता यादव, अनीता सोनकर, बिरसमुनी सिंह, लक्ष्मी बाई और अनीशा बाई सहित जिले की कई महिलाएं सिलाई, छोटे कारोबार और अन्य आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को अपनी जरूरतों और परिवार की प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च और बचत के फैसले लेने का अवसर दिया है। बच्चों की शिक्षा-पोषण से लेकर बेटी के भविष्य की बचत और स्वरोजगार तक, महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी परिस्थितियों के अनुसार कर रही हैं।
जशपुर की इन कहानियों में योजना का असर सिर्फ मासिक सहायता तक सीमित नहीं दिखता। जब यह राशि बचत, शिक्षा और आजीविका से जुड़ती है, तो उसका लाभ पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। महिलाओं के हाथ में आने वाली यह नियमित राशि उन्हें छोटी बचत से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का अवसर दे रही है।

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