मजदूरी से परिवार चलाया, अब पक्की छत के नीचे सुकून से रह रहा शिवप्रसाद का परिवार रायपुर, 29 सितंबर 2026। वर्षों तक कच्चे मकान में परिवार के...
मजदूरी से परिवार चलाया, अब पक्की छत के नीचे सुकून से रह रहा शिवप्रसाद का परिवार
रायपुर, 29 सितंबर 2026। वर्षों तक कच्चे मकान में परिवार के साथ गुजर-बसर करने वाले गौरेला के शिवप्रसाद भट्ट के लिए अब बारिश का मौसम चिंता नहीं, सुकून लेकर आता है। मजदूरी कर पत्नी, बेटे और बेटी का पालन-पोषण करने वाले शिवप्रसाद के परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिला है। योजना से मिली 2 लाख 30 हजार रुपये की सहायता से उनका वर्षों पुराना पक्के घर का सपना पूरा हुआ।
गौरेला के रवानपारा, वार्ड क्रमांक 11 निवासी शिवप्रसाद की आमदनी सीमित है। ऐसे में अपने दम पर पक्का मकान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। परिवार कच्चे मकान में रहता था और बारिश के दिनों में पानी टपकने समेत कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिलने के बाद शिवप्रसाद ने नगर पालिका गौरेला में आवास के लिए आवेदन किया। आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें योजना के तहत सहायता राशि मिली। इसके बाद परिवार के लिए पक्के मकान का निर्माण संभव हो सका।
पक्की छत ने बदली जिंदगी
शिवप्रसाद बताते हैं कि पहले बारिश शुरू होते ही घर की चिंता सताने लगती थी। अब पक्की छत है, इसलिए परिवार सुरक्षित है। उनके लिए यह मकान केवल ईंट-सीमेंट की इमारत नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा सपना है।
पक्के घर के साथ परिवार को दूसरी सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिला है। पत्नी को उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला, जिससे खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय भी मिला। वहीं महतारी वंदन योजना के तहत उनकी पत्नी को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है।
इन सुविधाओं ने परिवार की रोजमर्रा की कई मुश्किलें कम कर दी हैं। पक्की छत, गैस कनेक्शन, शौचालय और नियमित आर्थिक सहायता से अब परिवार पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और बेहतर जीवन जी रहा है।
सपनों के घर ने बढ़ाया भरोसा
शिवप्रसाद भट्ट ने पक्का घर मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि मजदूरी से परिवार चलाने वाले व्यक्ति के लिए अपने दम पर पक्का घर बनाना मुश्किल था। सरकारी सहायता से यह सपना पूरा हुआ और अब उनका परिवार सुरक्षित छत के नीचे रह रहा है।
शिवप्रसाद की कहानी बताती है कि किसी जरूरतमंद परिवार के लिए पक्का घर सिर्फ रहने की जगह नहीं होता। कच्चे घर से पक्के मकान तक का यह सफर सुरक्षा, सम्मान और भविष्य को लेकर बढ़े भरोसे की कहानी भी है।

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