पीएम-जुगा के तहत 1.80 करोड़ की क्लस्टर परियोजना मंजूर; स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे रायपुर, 15 सितंबर। जश...
पीएम-जुगा के तहत 1.80 करोड़ की क्लस्टर परियोजना मंजूर; स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे
रायपुर, 15 सितंबर। जशपुर में जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के तहत मंजूर इस परियोजना में 6 जनजातीय गांवों—किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ—को शामिल किया गया है। हर गांव में 5 होमस्टे बनाए जाएंगे। परियोजना पर करीब 1.80 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
होमस्टे के साथ गांवों में सामुदायिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर के कार्यों के लिए 5 लाख रुपए तक का प्रावधान किया गया है।
होटल नहीं, गांव में रहकर जानेंगे जशपुर की संस्कृति
परियोजना का फोकस कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म पर है। पर्यटक होमस्टे में स्थानीय परिवारों के साथ रहकर जशपुर की जनजातीय संस्कृति, खान-पान, लोक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव कर सकेंगे। इससे पर्यटन से होने वाली आय सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंचने के साथ गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
क्लस्टर को कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़ और लोरोघाट जैसे पर्यटन स्थलों से जोड़ा जाएगा। इससे पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिलने के साथ उनके जशपुर में अधिक समय रुकने की संभावना भी बढ़ेगी।
गाइड से लेकर हस्तशिल्प तक रोजगार
होमस्टे शुरू होने के बाद स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए पर्यटक गाइड, आतिथ्य सेवा, स्थानीय व्यंजन, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन गतिविधियों में काम के अवसर बनेंगे। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प की मांग भी बढ़ सकती है।
संस्कृति बचाते हुए परिवारों को मिले पर्यटन की कमाई
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय और ग्रामीण संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान है। सरकार का प्रयास है कि इस विरासत को संरक्षित रखते हुए स्थानीय समुदाय को पर्यटन से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि जशपुर की प्राकृतिक संपदा, जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोले जाएंगे। पर्यटक जशपुर आएं तो प्रकृति के साथ यहां के जनजातीय जीवन और परंपराओं को भी करीब से अनुभव करें, यही इस परियोजना का उद्देश्य है।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों और होटल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए। गांव और स्थानीय परिवारों को भी पर्यटन की पूरी प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाना जरूरी है। जशपुर का होमस्टे क्लस्टर स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को जोड़ने वाला मॉडल बनेगा।


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