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सेवा की कहानी: पारिवारिक हकत्याग का शुल्क घटा, किसान रामशरण को मिली 5 हजार की राहत

0.8% से घटकर 500 रुपए हुआ पंजीयन शुल्क, बची रकम अब खेती में लगाएंगे गरियाबंद के किसान रायपुर, 23 सितंबर 2026। पारिवारिक संपत्ति के हकत्याग...



0.8% से घटकर 500 रुपए हुआ पंजीयन शुल्क, बची रकम अब खेती में लगाएंगे गरियाबंद के किसान

रायपुर, 23 सितंबर 2026। पारिवारिक संपत्ति के हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क में कमी का सीधा लाभ गरियाबंद जिले के ग्राम कुम्ही निवासी किसान रामशरण चंद्राकर को मिला है। पहले संपत्ति के बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता था, जिसे घटाकर अब 500 रुपए कर दिया गया है। इस बदलाव से रामशरण को हकत्यागनामा के पंजीयन में करीब 5,100 रुपए की बचत हुई। वे इस राशि का उपयोग कृषि कार्यों में करेंगे।

बहन के नाम संपत्ति होने से आ रही थी परेशानी

रामशरण ने बताया कि पारिवारिक संपत्ति में उनकी बहन का नाम दर्ज होने के कारण कृषि से जुड़े कामों में उन्हें परेशानी हो रही थी। इसके समाधान के लिए पारिवारिक हकत्यागनामा कराया गया। शुल्क में कमी के कारण प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी कम खर्च में पूरी हो गई और करीब 5,100 रुपए की राशि बची।

500 रुपए में पूरा हो रहा हकत्यागनामा

वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए शुल्क सुधार के तहत संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच पारिवारिक हकत्यागनामा के पंजीयन के लिए अब केवल 500 रुपए शुल्क निर्धारित है। इससे संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर लगने वाले 0.8 प्रतिशत शुल्क की तुलना में परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के दौरान हितग्राहियों से संवाद में रामशरण ने अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना है कि शुल्क में बची राशि अब खेती में काम आएगी। सरकार के अनुसार, इस तरह के सुधारों का उद्देश्य नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और कम खर्चीला बनाना है।


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