ज्ञान और युवा शक्ति को विकास का आधार बनाकर उच्च शिक्षा में हो रहा व्यापक बदलाव विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक रायपुर, 25 सितंबर 2026। ...
ज्ञान और युवा शक्ति को विकास का आधार बनाकर उच्च शिक्षा में हो रहा व्यापक बदलाव
विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक
रायपुर, 25 सितंबर 2026। किसी भी समृद्ध और विकसित राज्य की नींव केवल भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि उसकी युवा पीढ़ी के ज्ञान, कौशल और कार्यक्षमता से मजबूत होती है। इसी सोच के साथ प्रदेश के विकास की दिशा में ‘जीवाईएएन’ यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को केंद्र में रखा गया है। युवाओं को आर्थिक और सामाजिक प्रगति की महत्वपूर्ण ताकत मानते हुए उच्च शिक्षा में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। शिक्षा को अब केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित रखने के बजाय रोजगार, उद्योग और बदलती तकनीकी जरूरतों से जोड़ा जा रहा है।
उच्च शिक्षा में मिशन मोड पर काम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्च शिक्षा विभाग मिशन मोड में काम कर रहा है। ‘उच्च शिक्षा मिशन योजना’ के प्रयासों से प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात यानी जीईआर वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 27.5 प्रतिशत हो गया है। इसे वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक सर्वसुविधायुक्त उत्कृष्टता केंद्र महाविद्यालय स्थापित किया जा रहा है। वहीं शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘राज्य अनुसंधान एवं नवाचार योजना’ का खाका तैयार किया गया है। आधुनिक विज्ञान के साथ विद्यार्थियों को देश की पारंपरिक ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है।
गुणवत्ता के साथ बढ़ रहा शैक्षणिक ढांचा
उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के मूल्यांकन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के मूल्यांकन के लिए पात्र 254 शासकीय महाविद्यालयों में से 200 तथा 9 में से 5 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है।
बढ़ती शैक्षणिक जरूरतों को देखते हुए अधोसंरचना का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 8 नए शासकीय महाविद्यालय, 5 नए निजी महाविद्यालय और 3 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों का दायरा और व्यापक होगा।
शिक्षकों की कमी दूर करने पर जोर
उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ाधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे संस्थानों में मानव संसाधन की कमी दूर करने के साथ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन और सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
शिक्षा, शोध, नवाचार, अधोसंरचना और रोजगारपरक कौशल पर एक साथ काम करते हुए प्रदेश उच्च शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहा है। ज्ञान और युवा शक्ति को विकास का आधार बनाकर किए जा रहे ये प्रयास वर्ष 2047 के विकसित और सशक्त छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।

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