घोलेंग में टेक्सटाइल प्रशिक्षण से रोजगार और स्वरोजगार की राह हो रही मजबूत श्री सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक श्रीमती नूतन सिदार, सहायक संच...
घोलेंग में टेक्सटाइल प्रशिक्षण से रोजगार और स्वरोजगार की राह हो रही मजबूत
श्री सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक
श्रीमती नूतन सिदार, सहायक संचालक
रायपुर, 13 सितंबर 2026। कभी घर-आंगन और गांव की परंपराओं तक सीमित रहने वाला हुनर अब रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह बना रहा है। जशपुर जिले के ग्राम घोलेंग में पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण और बाजार की जरूरतों से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाओं और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। यह पहल स्थानीय हुनर को नई पहचान देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के प्रयासों को गति दी जा रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिलाओं और युवाओं को आधुनिक तकनीक व कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया है। घोलेंग का आजीविका परिसर इसी सोच को जमीन पर साकार करता दिखाई दे रहा है।
प्रशिक्षण के साथ उत्पादन, हुनर को आय से जोड़ने की पहल
ग्राम घोलेंग स्थित आजीविका परिसर में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को टेक्सटाइल एवं हैंडलूम से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आदित्य बिरला ग्रुप, जिला प्रशासन, बिहान और टेक्सटाइल स्किल सेक्टर काउंसिल के संयुक्त प्रयास से संचालित इस पहल में प्रशिक्षण के साथ उत्पादन गतिविधियों पर भी जोर दिया जा रहा है।
घोलेंग में आजीविका से परंपरागत रूप से जुड़े करीब 35 से 40 परिवारों और स्व सहायता समूहों की महिलाओं को हैंडलूम व टेक्सटाइल से संबंधित कार्य सिखाए जा रहे हैं। महिलाएं आधुनिक मशीनों और तकनीक के माध्यम से कपड़ा तैयार करने के साथ शॉल, साड़ी और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने का हुनर सीख रही हैं।
इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि हुनर को आय का साधन बनाना है। प्रशिक्षण के साथ उत्पादन का अवसर मिलने से महिलाएं सीखे हुए कौशल को वास्तविक काम में इस्तेमाल कर रही हैं और इसे अपनी नियमित आजीविका से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
परंपरा और तकनीक का संगम
जशपुर की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय हुनर से है। घोलेंग में इसी पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को उत्पादन की आधुनिक प्रक्रियाओं के साथ डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी जा रही है।
इससे हस्तकरघा कला को केवल सांस्कृतिक विरासत के रूप में संरक्षित करने के बजाय आधुनिक आर्थिक गतिविधि से जोड़ने का रास्ता तैयार हो रहा है। बेहतर डिजाइन और गुणवत्ता वाले उत्पादों को बाजार से जोड़ने की तैयारी से स्थानीय हस्तकरघा उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
महिला समूह बनेंगे आर्थिक बदलाव के वाहक
इस पहल की महत्वपूर्ण कड़ी महिला स्व सहायता समूह हैं। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अपने समूहों के माध्यम से उत्पादन गतिविधियों में भागीदारी कर सकेंगी। इससे समूह आधारित आजीविका को बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं के लिए आय के नए स्रोत विकसित होने की संभावना है।
महिलाओं की आर्थिक मजबूती का असर परिवार तक सीमित नहीं रहता। आय बढ़ने से परिवार की जरूरतों की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा और घरेलू आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी मजबूत होती है। इस तरह घोलेंग की यह पहल महिला सशक्तिकरण से ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
युवाओं के लिए अपने क्षेत्र में रोजगार की संभावना
टेक्सटाइल क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को भी प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें रोजगारपरक कौशल देकर अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
स्थानीय स्तर पर कौशल और रोजगार के अवसर मिलने से युवाओं को काम की तलाश में दूसरे शहरों की ओर जाने की जरूरत कम हो सकती है। प्रशिक्षित युवा भविष्य में उत्पादन इकाई, समूह आधारित गतिविधि या अन्य स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आर्थिक पहचान बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।
हुनर, उत्पादन और बाजार के बीच सेतु बनेगा घोलेंग
घोलेंग स्थित हैंडलूम प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र को भविष्य में कौशल, उत्पादन और बाजार के बीच मजबूत कड़ी के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यहां तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन को बाजार की मांग के अनुरूप बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय प्रतिभा को व्यापक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिले।
यह पहल बताती है कि परंपरागत हुनर को आधुनिक कौशल, तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा जाए तो वही हुनर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।
हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता जशपुर
घोलेंग में चल रही यह पहल केवल कपड़ा बनाने का प्रशिक्षण नहीं है, बल्कि हुनर को सम्मान, कौशल को अवसर और अवसर को आय में बदलने की कोशिश है। महिलाओं के हाथों में आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक हुनर है, युवाओं के सामने रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
जहां कभी हस्तकरघा केवल परंपरा की पहचान हुआ करता था, वहीं अब वही हुनर रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। घोलेंग की यह पहल आने वाले समय में जशपुर के स्थानीय हुनर को नई पहचान देने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की प्रभावी मिसाल बन सकती है।

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