प्रति एकड़ कमाया 1.07 लाख रुपए का शुद्ध लाभ रायपुर, 02 सितंबर 2026। पारंपरिक खेती से इतर आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी फसलों को अपनाने से क...
प्रति एकड़ कमाया 1.07 लाख रुपए का शुद्ध लाभ
रायपुर, 02 सितंबर 2026। पारंपरिक खेती से इतर आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी फसलों को अपनाने से किसानों की तकदीर बदल रही है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा अंतर्गत ग्राम टेंगराही के कृषक श्री नारायण प्रसाद वर्मा ने इसे सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग से करेले की व्यावसायिक खेती अपनाकर वे न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
सरकारी अनुदान और योजनाओं का मिला लाभ
युवा किसान नारायण प्रसाद वर्मा की करेले की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। पिछले कई वर्षों से वे करेले की खेती कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। 1.06 हेक्टेयर कृषि भूमि के मालिक श्री वर्मा पहले केवल धान की पारंपरिक खेती करते थे, जिससे उन्हें सीमित आय प्राप्त होती थी। आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लिया।
योजना के तहत शासन की ओर से उन्हें एक हेक्टेयर क्षेत्र में करेले की खेती के लिए 24 हजार रुपए का अनुदान मिला। वहीं, सपोर्ट सिस्टम स्थापना के लिए 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सहायता के रूप में 5 हजार रुपए की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की गई।
आधुनिक कृषि तकनीकों ने बढ़ाई उपज
श्री वर्मा ने खेती में नवाचार करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई), प्लास्टिक मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग किया। इन तकनीकों से पानी की बचत के साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि करेले की उन्नत खेती आधुनिक तकनीकों और मचान विधि से करने पर किसान कम समय में अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि खेत में नमी बनाए रखने और खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए मल्चिंग शीट का उपयोग किया जाता है। वहीं, फसल की सिंचाई में पानी की बचत के लिए ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई पद्धति अपनाई गई। आधुनिक तकनीकों के समुचित उपयोग से फसल की बेहतर देखभाल और उत्पादन संभव हुआ।
12 टन उत्पादन से 1.07 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा
करेले की खेती कर रहे किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने बताया कि पहले वे पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, लेकिन इसमें अपेक्षित मुनाफा नहीं हो पाता था। इसके बाद उन्होंने करेले की खेती शुरू की, जिसमें उन्हें अच्छा लाभ मिला।
तकनीकी प्रबंधन और उचित देखरेख के कारण उन्हें प्रति एकड़ लगभग 12 टन करेले का उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में फसल का उचित मूल्य मिलने के बाद सभी लागत और खर्च निकालने के पश्चात उन्हें प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 7 हजार रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
करेले की उन्नत खेती से मिली इस सफलता ने न केवल श्री वर्मा के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि कृषि के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। उनकी सफलता यह बताती है कि पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों और लाभकारी उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।


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