——

Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

- Advertisement - Ads " alt="" />" alt="" />

कृषि कार्यों में शामिल हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धान रोपाई की तैयारियों का किया शुभारंभ रायपुर, 24 जुलाई 2026 , प्रदेश में मानसून की अच्छी वर्षा के साथ खेती-किसानी का क...




स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धान रोपाई की तैयारियों का किया शुभारंभ

रायपुर, 24 जुलाई 2026 , प्रदेश में मानसून की अच्छी वर्षा के साथ खेती-किसानी का कार्य गति पकड़ चुका है। इसी क्रम में दुर्ग शहर विधायक एवं प्रदेश के शिक्षा, ग्रामोद्योग तथा विधि-विधायी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव शुक्रवार को अपने गृहग्राम अहिवारा के समीप स्थित माटरा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों के साथ खेत में उतरकर कृषि कार्यों में सहभागिता निभाई। मंत्री श्री यादव ने स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धान रोपाई से पूर्व खेत की मताई की तथा लगभग दो एकड़ भूमि को रोपाई के लिए तैयार कराया। इस दौरान उन्होंने खेत का निरीक्षण कर खाद की उपलब्धता एवं खेती की तैयारियों की जानकारी ली तथा किसानों को समय पर निंदाई-गुड़ाई सहित आवश्यक कृषि कार्य करने की सलाह दी। इसके पश्चात उन्होंने धान रोपाई कार्य का शुभारंभ कराया।


खेती-किसानी हमारे जीवन का आधार

         मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि व्यक्ति चाहे किसी भी पद पर पहुंच जाए, उसे अपनी माटी, संस्कृति और मूल कार्य से जुड़ाव कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं किसान परिवार से हूं। खेती-किसानी हमारे जीवन का आधार है। समय मिलने पर आज भी खेत में जाकर खेती के कार्यों में भाग लेता हूं।" उन्होंने कहा कि खेती केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।


कृषि परंपरा और ग्रामीण संस्कृति के प्रति आत्मीय जुड़ाव

       मंत्री बनने के बाद भी श्री यादव अपनी खेती की स्वयं देखरेख करते हैं तथा प्रतिवर्ष कृषि कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। उनका मानना है कि किसानों की मेहनत, चुनौतियों और आवश्यकताओं को समझने के लिए खेत से निरंतर जुड़े रहना आवश्यक है। किसान परिवार से होने के कारण वे किसानों की समस्याओं एवं जरूरतों को बेहतर ढंग से समझते हैं। खेत में किसानों के साथ उनकी सक्रिय सहभागिता छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि परंपरा और ग्रामीण संस्कृति के प्रति उनके आत्मीय जुड़ाव का सशक्त उदाहरण है।


No comments