रायपुर, 20 जुलाई 2026 . मत्स्य पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आजीविका, पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है। पारंपर...
रायपुर, 20 जुलाई 2026 . मत्स्य पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आजीविका, पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है। पारंपरिक तालाबों से लेकर आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से मछली पालन करने से कई किसानों के जीवन को एक नई दिशा दी है। पारंपरिक खेती के संघर्ष से निकलकर सुरेन्द्र नाग मछली पालन को व्यवसाय बनाया और एक साधारण किसान से मत्स्य पालन के अग्रदूत के रूप में पहचान बनाई।
शासकीय सहयोग ने सुरेन्द्र नाग की जि़ंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी
जब सोच में नयापन और इरादों में मज़बूती हो, तो बंजर दिखती राहें भी समृद्धि का द्वार खोल देती हैं। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल जिला नारायणपुर के करलखा गांव में रहने वाले सुरेन्द्र नाग की कहानी कुछ ऐसी ही है। कुछ वर्ष पहले तक वे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। मौसम की अनिश्चितता और सीमित साधनों के बीच परिवार की ज़रूरतों को पूरा करना उनके लिए हर दिन की एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन सही समय पर मिले एक सही फैसले और शासकीय सहयोग ने उनकी जि़ंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी।
वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक से मछली पालन का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन लिया
सुरेन्द्र की इस नई यात्रा की शुरुआत तब हुई, जब उन्हें मत्स्य पालन विभाग के ज़रिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के बारे में पता चला। खेती के साथ-साथ कुछ नया करने की ललक में उन्होंने वर्ष 2022-23 में अपनी निजी भूमि के एक हेक्टेयर जलक्षेत्र में तालाब निर्माण की योजना बनाई। करीब 7 लाख रुपये की कुल लागत वाले इस सपने को पूरा करने में शासन ने आगे बढ़कर उनका हाथ थामा और 4.20 लाख रुपए का अनुदान स्वीकृत किया। बाकी 2.80 लाख रुपए का इंतज़ाम सुरेन्द्र ने अपनी मेहनत की बचत से किया। तालाब तो बनकर तैयार हो गया, लेकिन असली परीक्षा आधुनिक और सही तरीके से काम करने की थी। यहाँ मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने सुरेन्द्र को अकेले नहीं छोड़ा। उन्होंने समय-समय पर तालाब स्थल पर आकर सुरेन्द्र को वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक से मछली पालन का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया। सुरेन्द्र ने भी पूरी लगन के साथ इन तकनीकों को अपने काम में उतारा।
झींगा का भरपूर उत्पादन के साथ मुर्गी पालन भी शुरू
परिणाम उम्मीद से भी बेहतरीन रहे। जिला कलेक्टर के निर्देशन में योजनाओं का लाभ धरातल तक पहुँचाने की मुहिम के तहत वर्ष 2025-26 में विभाग द्वारा सुरेन्द्र को उच्च गुणवत्ता वाला झींगा बीज भी उपलब्ध कराया गया। आज उनके तालाब से हर साल औसतन 1000 से 2000 किलोग्राम मछली और लगभग 150 किलोग्राम झींगा का भरपूर उत्पादन हो रहा है। इतना ही नहीं, अपनी आय के स्रोतों को और अधिक मज़बूत करने के लिए सुरेन्द्र ने मत्स्य व झींगा पालन के साथ-साथ मुर्गी पालन भी शुरू कर दिया है। इस एकीकृत व्यवस्था की बदौलत आज सुरेन्द्र नाग को हर साल 2.50 लाख रुपए से 3.50 लाख रुपए तक की अतिरिक्त शुद्ध आय हो रही है। जिस परिवार को कभी अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए जूझना पड़ता था, आज वह न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ है, बल्कि एक सम्मानजनक जीवन जी रहा है।
युवाओं और किसानों के लिए एक जीवंत मिसाल बना सुरेन्द्र नाग
अपनी इस सफलता पर खुशी ज़ाहिर करते हुए सुरेन्द्र नाग कहते हैं कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने मुझे सही मायनों में आत्मनिर्भर बनाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग का मार्गदर्शन न मिलता, तो शायद मैं आज भी पुरानी सीमाओं में ही बँधा रहता। सुरेन्द्र नाग की यह यात्रा सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि नारायणपुर के उन तमाम युवाओं और किसानों के लिए एक जीवंत मिसाल है जो पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर अपनी मेहनत और शासन की योजनाओं के बल पर आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखना चाहते हैं।

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