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कृत्रिम गर्भाधान से बदली पशुपालक की किस्मत, दुग्ध उत्पादन बढ़ा और आय में हुआ इजाफा

सूरजपुर के हीरालाल सोनवानी बने आधुनिक डेयरी मॉडल, रोजाना 40 लीटर तक दूध उत्पादन रायपुर, 30 जुलाई। छत्तीसगढ़ में पशुपालन विभाग की योजनाएं ग्र...




सूरजपुर के हीरालाल सोनवानी बने आधुनिक डेयरी मॉडल, रोजाना 40 लीटर तक दूध उत्पादन

रायपुर, 30 जुलाई। छत्तीसगढ़ में पशुपालन विभाग की योजनाएं ग्रामीणों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम अगस्तपुर निवासी हीरालाल सोनवानी ने कृत्रिम गर्भाधान और विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर पारंपरिक पशुपालन को लाभकारी डेयरी व्यवसाय में बदल दिया है।

करीब 16 वर्षों से पशुपालन कर रहे हीरालाल के पास वर्तमान में चार दुधारू गाय, तीन बछिया और चार बछड़े हैं। कृष्णपुर पशु चिकित्सीय उपकेंद्र के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान सेवा का लाभ मिलने से उन्हें उन्नत नस्ल के पशु प्राप्त हुए, जिससे दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज वे प्रतिदिन 35 से 40 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं।

हीरालाल बताते हैं कि उन्नत नस्ल की गायों से दूध की मात्रा के साथ पशुओं का स्वास्थ्य और उत्पादकता भी बेहतर हुई है। इससे उनकी नियमित आय बढ़ी है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि मादा-वत्स पालन योजना के तहत मिली एक बछिया ने भी उनके पशुधन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर दी गई तकनीकी सलाह, टीकाकरण, पोषण संबंधी मार्गदर्शन और प्रजनन सेवाओं से उनका डेयरी व्यवसाय अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बन सका है।

हीरालाल सोनवानी ने अन्य पशुपालकों से भी कृत्रिम गर्भाधान और विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि उन्नत नस्ल के पशुओं का पालन ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी माध्यम है।

पशुपालन विभाग के अनुसार कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय पशुधन की नस्ल में सुधार, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, पशुपालकों की आय बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

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