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बाल अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सख्त हुआ आयोग, खेल मैदानों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक

स्कूलों में अनिवार्य होगा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का प्रदर्शन, ड्रॉपआउट बच्चों की होगी घर-घर निगरानी रायपुर, 30 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ राज्य...



स्कूलों में अनिवार्य होगा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का प्रदर्शन, ड्रॉपआउट बच्चों की होगी घर-घर निगरानी

रायपुर, 30 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग ने प्रदेश में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षित वातावरण को लेकर सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। धमतरी जिला मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अधिकारियों को बच्चों के हितों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों के खेल मैदानों का किसी भी स्थिति में व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। जिन खेल मैदानों का उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, उन्हें तत्काल मुक्त कराकर बच्चों के खेलकूद के लिए उपलब्ध कराया जाए।

बैठक में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ सहित पुलिस, शिक्षा और बाल संरक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

स्कूलों में अंकित होगा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों की दीवारों तथा प्रमुख स्थानों पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 एवं संबंधित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता सबसे जरूरी है। साथ ही पिछले तीन वर्षों में स्कूल छोड़ चुके बच्चों (ड्रॉपआउट) का घर-घर जाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी बच्चा बाल श्रम, बाल विवाह या मानव तस्करी जैसी घटनाओं का शिकार न हो।

पॉक्सो मामलों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर

बैठक में पुलिस विभाग को पॉक्सो (POCSO) मामलों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक थाने में बाल कल्याण अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण प्रदर्शित करने को कहा गया।

डॉ. शर्मा ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना सरकार और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है। बच्चों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जर्जर शौचालयों की मरम्मत और बेटियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

आयोग अध्यक्ष ने विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर देते हुए छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल और बेहतर खेल सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

धमतरी जिले में शिक्षा विभाग द्वारा 1,076 स्कूलों में से जर्जर शौचालयों के स्थान पर 34 बालिका और 84 बालक शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव जिला पंचायत को भेजा गया है।

धमतरी में खेल और बाल संरक्षण की दिशा में हो रहे प्रयास

धमतरी जिले में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 81 मिनी स्टेडियमों में खेल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। वहीं 36 प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से 1,160 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा जून 2026 में चलाए गए अभियान में 6 बालिकाओं और बाल श्रम में लगे 1 बालक का रेस्क्यू किया गया। पिछले तीन वर्षों में जिले में कुल 30 बच्चों का सफल पुनर्वास कराया जा चुका है।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने सभी विभागीय अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ बच्चों के हितों से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और पूरी जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

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