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मेट्स विश्वविद्यालय में औषधि विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन

देशभर के विशेषज्ञों ने ड्रग डिस्कवरी, फार्मास्युटिकल रिसर्च और मरीजों की देखभाल में एआई की भूमिका पर साझा किए नवीनतम शोध एवं अनुभव आरंग/रा...



देशभर के विशेषज्ञों ने ड्रग डिस्कवरी, फार्मास्युटिकल रिसर्च और मरीजों की देखभाल में एआई की भूमिका पर साझा किए नवीनतम शोध एवं अनुभव

आरंग/रायपुर, 18 जुलाई 2026। मेट्स विश्वविद्यालय, आरंग परिसर स्थित मेट्स स्कूल ऑफ फार्मेसी द्वारा "औषधि खोज एवं विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उभरती प्रवृत्तियाँ" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को सफल समापन हुआ। 17 एवं 18 जुलाई को आयोजित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता कर औषधि विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

संगोष्ठी का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया, महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया, कुलपति प्रो. (डॉ.) के.पी. यादव तथा कुलसचिव डॉ. गोकुलानंद पांडा की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवाओं और औषधि अनुसंधान के क्षेत्र में नई क्रांति ला रही है। उन्होंने कहा कि दवा खोज, गुणवत्ता नियंत्रण, क्लीनिकल रिसर्च तथा मरीजों की बेहतर देखभाल में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है और ऐसे समसामयिक विषयों पर राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियां विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

दो दिवसीय आयोजन के दौरान चार प्रमुख तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले दिन आईआईटी (बीएचयू) के औषधि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दिनेश कुमार ने "AI and ML-assisted PAT Tools for Continuous Crystallization and Continuous Manufacturing" विषय पर व्याख्यान देते हुए आधुनिक औषधि निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के उपयोग को विस्तार से समझाया।

इसके बाद पिनेकल बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, भोपाल की निदेशक डॉ. मेघा झा ने "Artificial Intelligence in Pharmaceutical Sciences: From Drug Discovery to Patient Care" विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि एआई दवा खोज से लेकर रोगियों के उपचार और व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज्ड मेडिसिन) तक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, तेज और सटीक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दूसरे दिन असम डॉन बॉस्को विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के प्रोफेसर डॉ. दीपक शर्मा ने "AI-Driven Quality by Design (QbD) in Analytical Method Development" विषय पर व्याख्यान देते हुए गुणवत्ता आधारित औषधि विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। वहीं एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा के एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल प्रताप सिंह ने "AI-Assisted Selection of Suitable Journals for Research Publications" विषय पर व्याख्यान देते हुए शोध प्रकाशन के लिए उपयुक्त जर्नल चयन में एआई आधारित तकनीकों की उपयोगिता से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

प्रत्येक तकनीकी सत्र के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इस दौरान शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने औषधि विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नवीनतम अनुप्रयोगों, अनुसंधान की संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की।

समापन समारोह में मेट्स स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार नायक ने आयोजन समिति की ओर से कुलाधिपति, महानिदेशक, कुलपति, कुलसचिव, सभी विशिष्ट वक्ताओं, आयोजन समिति के सदस्यों, संकाय सदस्यों, तकनीकी सहयोगी टीम तथा देशभर से आए प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और सक्रिय सहभागिता से यह राष्ट्रीय संगोष्ठी ज्ञानवर्धक, शोधोन्मुख और अत्यंत सफल रही।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय आयोजन मेट्स विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा अंतःविषयक अधिगम को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं। साथ ही औषधि विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी समावेशन के माध्यम से भविष्य के फार्मासिस्टों और शोधकर्ताओं को वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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