रायपुर, 14 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी "विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)" योजना ग्रामीण...
रायपुर, 14 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी "विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)" योजना ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत खोटलापाल में इस योजना के तहत निर्मित एक डबरी (छोटा तालाब) ने किसान सोनधर की जिंदगी बदल दी है। जल संचयन की इस पहल ने न केवल सिंचाई की समस्या दूर की, बल्कि खेती, मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के नए अवसर भी उपलब्ध कराए हैं।
बारिश का पानी बना खेती की ताकत
ग्राम खोटलापाल निवासी किसान सोनधर ने बताया कि पहले बारिश का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था। गर्मी के दिनों में खेतों की सिंचाई के लिए पानी का गंभीर संकट रहता था, जिससे खेती प्रभावित होती थी। डबरी बनने के बाद अब वर्षा जल का प्रभावी संचयन होने लगा है और पूरे साल सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है। इससे खेती की स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
अब अतिरिक्त फसलें ले रहे किसान
सिंचाई सुविधा बेहतर होने के कारण सोनधर अब साल में अतिरिक्त फसलें भी ले रहे हैं। खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से सब्जी उत्पादन (बाड़ी विकास) और पशुपालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। इससे परिवार की आय में लगातार वृद्धि हो रही है और खेती पहले की तुलना में अधिक लाभदायक बन गई है।
मछली पालन बना अतिरिक्त आमदनी का जरिया
डबरी ने केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि आय के नए स्रोत भी खोले हैं। सोनधर ने डबरी में मछली पालन शुरू किया है, जिससे उन्हें हर वर्ष अच्छी अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। अब वे भविष्य में इसी डबरी में बतख पालन शुरू करने की भी योजना बना रहे हैं, ताकि आजीविका के साधनों में और विस्तार हो सके।
पूरे गांव को मिला जल संरक्षण का लाभ
डबरी निर्माण का लाभ केवल एक किसान तक सीमित नहीं रहा। इसके कारण आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर बेहतर हुआ है, जिससे निकटवर्ती कुओं और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता बढ़ी है। खेतों में नमी लंबे समय तक बनी रहने से आसपास के किसानों की फसलों को भी फायदा मिल रहा है। जल संरक्षण की इस पहल ने पूरे गांव में कृषि और पर्यावरण दोनों को मजबूती दी है।
ग्रामीणों को गांव में ही मिला रोजगार
डबरी निर्माण कार्य के दौरान ग्राम पंचायत के जॉब कार्डधारी श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मिला। इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ी और रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लगी। योजना ने जल संरक्षण के साथ ग्रामीण रोजगार सृजन का भी सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है।
आत्मनिर्भर गांव की दिशा में सफल पहल
खोटलापाल में डबरी निर्माण का यह मॉडल साबित करता है कि यदि सरकारी योजनाओं को जनभागीदारी के साथ प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो जल संरक्षण, कृषि विकास, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को एक साथ मजबूत किया जा सकता है। बस्तर का यह उदाहरण प्रदेश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभर रहा है।

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