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आषाढ़ की तृतीया पर रामलला का मनोहारी श्रृंगार: दिव्य स्वरूप के दर्शन से भक्त हुए भाव-विभोर

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में विराजमान ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला सरकार का आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि, विक्...




अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में विराजमान ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला सरकार का आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि, विक्रम संवत 2082 के अवसर पर गुरुवार को भव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। मनोहारी वेशभूषा और दिव्य आभूषणों से सुसज्जित रामलला के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

रामलला का श्रृंगार प्रतिदिन ऋतु और परंपरा के अनुरूप किया जाता है। गर्मी के मौसम में उन्हें हल्के एवं सूती वस्त्र धारण कराए जाते हैं, जबकि प्रत्येक दिन अलग-अलग प्रकार के पुष्पों से विशेष सज्जा की जाती है। भगवान को अर्पित होने वाली पुष्पमालाएं विशेष रूप से दिल्ली से मंगाई जाती हैं।

मंदिर की दैनिक पूजा-अर्चना प्रातः 6:30 बजे मंगला आरती से प्रारंभ होती है। इसके पहले प्रभु को जागृत कर विधि-विधान से स्नान, लेप और वस्त्र धारण कराए जाते हैं। इसके बाद भक्तों के लिए दर्शन प्रारंभ होते हैं। दोपहर 12 बजे भोग आरती और शाम 7:30 बजे संध्या आरती संपन्न होती है। रात्रि 8:30 बजे शयन आरती के साथ दिनभर की पूजा संपन्न होती है, जबकि श्रद्धालु शाम 7:30 बजे तक ही रामलला के दर्शन कर सकते हैं।

रामलला को प्रतिदिन चार बार भोग अर्पित किया जाता है। सुबह बाल भोग से शुरुआत होती है और दिनभर विभिन्न समय पर ऋतु एवं परंपरा के अनुसार तैयार किए गए व्यंजन मंदिर की रसोई में बनाकर प्रभु को समर्पित किए जाते हैं। आषाढ़ की तृतीया पर हुए इस विशेष श्रृंगार ने अयोध्या धाम के आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

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