रायपुर। मैट्स यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज के इंग्लिश डिपार्टमेंट द्वारा पांडरी स्थित परिसर में 24 और 25 जून को आयोजित दो ...
रायपुर। मैट्स यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज के इंग्लिश डिपार्टमेंट द्वारा पांडरी स्थित परिसर में 24 और 25 जून को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस "बियॉन्ड बैटलस्केप्स: लिटरेचर, फ़िल्मों और मीडिया में युद्ध का चित्रण" का बुधवार को शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में भारत और विदेशों से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, मीडिया विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने साहित्य, फिल्मों और मीडिया में युद्ध तथा संघर्ष के विविध आयामों पर विचार-विमर्श किया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आईपीएस अधिकारी एवं डीसीपी (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला ने कहा कि युद्ध भले कुछ समय का हो, लेकिन उसकी कहानियां साहित्य और मीडिया के माध्यम से पीढ़ियों तक जीवित रहती हैं। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मीडिया और साहित्य समाज में संघर्ष, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शोधार्थियों और विद्यार्थियों से मीडिया नैरेटिव और उसके सामाजिक प्रभावों का गंभीर विश्लेषण करने का आह्वान किया।
मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव ने कहा कि युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव पूरी मानवता पर पड़ता है। साहित्य, फिल्में और मीडिया अपने-अपने दृष्टिकोण से युद्ध की अलग-अलग कहानियां प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने इस विषय पर गंभीर शैक्षणिक विमर्श के लिए आयोजन समिति की सराहना की।
इंग्लिश डिपार्टमेंट की विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना दास सरखेल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में युद्ध साहित्य, ट्रॉमा स्टडीज़, मीडिया चित्रण, सिनेमा और संघर्ष जैसे विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। विभिन्न तकनीकी सत्रों में विद्वानों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे अकादमिक संवाद को नई दिशा मिली।
चांसलर श्री गजराज पगारिया, कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. दीपिका ढांड, डायरेक्टर जनरल श्री प्रियेश पगारिया तथा रजिस्ट्रार श्री गोकुलानंद पांडा ने सम्मेलन के सफल आयोजन पर इंग्लिश डिपार्टमेंट और आयोजन समिति को बधाई देते हुए शोधार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की।
कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन 25 जून को तकनीकी सत्रों, शोध-पत्र प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श के साथ जारी रहेगा। इन सत्रों का उद्देश्य साहित्य, फिल्मों और मीडिया में युद्ध के चित्रण को नए दृष्टिकोण से समझना और इस विषय पर वैश्विक शैक्षणिक संवाद को आगे बढ़ाना।
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