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ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से बदली किसान की तकदीर

रायपुर, 15 जून 2026 / छत्तीसगढ़ में कृषि नवाचार और उद्यानिकी फसलों के विस्तार का असर अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। महासमुंद जिले के व...


रायपुर, 15 जून 2026 / छत्तीसगढ़ में कृषि नवाचार और उद्यानिकी फसलों के विस्तार का असर अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। महासमुंद जिले के विकासखंड महासमुंद अंतर्गत ग्राम लोहारडीह निवासी प्रगतिशील किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत आय वृद्धि का उदाहरण है, बल्कि राज्य में कृषि विविधीकरण और तकनीक आधारित खेती की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभरी है। एम.टेक. तक शिक्षित श्री चंद्राकर पूर्व में अपनी 1.46 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर मुख्यतः धान की खेती करते थे। परंतु अधिक जल उपयोग, बढ़ती उत्पादन लागत तथा सीमित लाभ के कारण उन्हें अपेक्षित आर्थिक परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कृषि में नवाचार और उद्यानिकी फसलों की ओर रुख करने का निर्णय लिया।

    वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना  के अंतर्गत संचालित ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम में सहभागिता की। इस योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपये की डीबीटी आधारित अनुदान सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्हें तकनीकी खेती अपनाने में प्रारंभिक सहयोग मिला। तकनीकी मार्गदर्शन के अनुरूप उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली एवं मल्चिंग तकनीक का उपयोग करते हुए ग्राफ्टेड बैंगन की खेती प्रारंभ की। आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वित उपयोग से न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई, बल्कि फसल की गुणवत्ता और बाजार में उसकी स्वीकार्यता भी बेहतर हुई।

    किसान चंद्राकर के अनुसार, पारंपरिक धान खेती से उन्हें लगभग 35 हजार रुपये का सीमित लाभ प्राप्त होता था, जबकि ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से प्रति एकड़ लगभग 400 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हुआ। औसतन 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री के परिणामस्वरूप कुल आय में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। सभी कृषि लागतों,जिसमें श्रम, इनपुट सामग्री एवं अन्य व्यय शामिल है,को घटाने के पश्चात उन्हें प्रति एकड़ लगभग 6.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उनकी सफलता के बाद क्षेत्र के अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों, विशेषकर ग्राफ्टेड सब्जियों, ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग जैसी तकनीकों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। यह बदलाव जिले में कृषि विविधीकरण और जल संरक्षण आधारित खेती को नई दिशा प्रदान कर रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के प्रदर्शन कार्यक्रमों से किसानों में तकनीकी जागरूकता बढ़ रही है और छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

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