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शासकीय पुनर्वास केंद्रों से दिव्यांगजनों को मिला नया जीवन

   निःशुल्क फिजियोथेरेपी व कृत्रिम अंग सेवाओं से हितग्राही बने आत्मनिर्भर रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित माना...

  

निःशुल्क फिजियोथेरेपी व कृत्रिम अंग सेवाओं से हितग्राही बने आत्मनिर्भर

रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित माना कैंप, रायपुर स्थित शासकीय पुनर्वास संस्थान दिव्यांगजनों के लिए संबल और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनते जा रहे हैं। यहाँ उपलब्ध निःशुल्क फिजियोथेरेपी, पुनर्वास उपचार एवं सहायक उपकरण सेवाओं से अनेक जरूरतमंद नागरिकों का जीवन सकारात्मक रूप से परिवर्तित हुआ है।

माना कैंप स्थित सी.पी. गेटलैब एवं फिजिकल रिफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर की प्रभावी सेवाओं से लाभान्वित दो हितग्राहियों की कहानी इस बात का प्रमाण हैं कि शासन की योजनाएँ जमीनी स्तर पर सार्थक परिणाम दे रही हैं।

माना कैंप रायपुर निवासी 45 वर्षीय श्री रवि कुमार केशलवार 25 मई 2025 को लकवा (पैरालिसिस) से प्रभावित हो गए थे, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियाँ गंभीर रूप से बाधित हो गई थीं। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से जानकारी प्राप्त होने के उपरांत 25 जुलाई 2025 से उन्हें सी.पी. गेटलैब, माना कैंप में विशेषज्ञ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में नियमित फिजियोथेरेपी उपचार उपलब्ध कराया गया। लगभग तीन माह तक चले निःशुल्क उपचार एवं व्यायाम प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप वे वर्तमान में पूर्णतः स्वस्थ होकर दैनिक कार्य स्वतंत्र रूप से कर पा रहे हैं।

इसी प्रकार 55 वर्षीय श्री मोहन लाल निर्मलकर, निवासी माना बस्ती, रायपुर, वर्ष 2025 में एक दुर्घटना के कारण पैर क्षतिग्रस्त होने से चलने-फिरने में असमर्थ हो गए थे। समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित शिविर के माध्यम से उन्हें फिजिकल रिफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर, माना कैंप की जानकारी मिली। 9 दिसंबर 2025 को केंद्र में परीक्षण उपरांत उन्हें निःशुल्क कृत्रिम पैर प्रदान किया गया तथा विशेषज्ञों द्वारा चलने का प्रशिक्षण दिया गया। वर्तमान में वे सफलतापूर्वक चल-फिर रहे हैं और सामाजिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

दोनों हितग्राहियों ने माना कैंप रायपुर स्थित पुनर्वास केंद्रों के चिकित्सकों, फिजियोथेरेपिस्टों एवं समस्त स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त किया है।
छत्तीसगढ़ शासन की यह मानवीय पहल दिव्यांगजनों को न केवल बेहतर उपचार उपलब्ध करा रही है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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