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: दोना-पत्तल निर्माण का हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं और किशोरियां, डोमनहिल में आयोजित हुई स्वावलंबन कार्यशाला

हस्तशिल्प प्रशिक्षण से खुलेगा स्वरोजगार का रास्ता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत महिलाओं को मिला हुनर का संबल एमसीबी/03 नवंबर 2026, बेटी ...



हस्तशिल्प प्रशिक्षण से खुलेगा स्वरोजगार का रास्ता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत महिलाओं को मिला हुनर का संबल


एमसीबी/03 नवंबर 2026, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को डोमनहील, चिरमिरी में हस्तशिल्प एवं स्वावलंबन कार्यशाला तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के निर्देशानुसार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा के मार्गदर्शन में जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब), महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को दोना-पत्तल बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को हस्तशिल्प के माध्यम से स्वरोजगार अपनाने और स्वयं का छोटा व्यवसाय अथवा लघु उद्योग शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनाते हुए समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। प्रशिक्षिका श्रीमती शिवानी ने प्रतिभागियों को दोना-पत्तल निर्माण की विधि समझाई तथा इस कौशल को आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को बताया गया कि वे उपलब्ध संसाधनों और अपने कौशल के आधार पर छोटे व्यवसाय की शुरुआत कर सकती हैं। साथ ही परिवार एवं समाज के निर्णयों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, उनके अधिकारों, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कौशल विकास एवं प्रशिक्षण के माध्यम से इनमें उद्यमिता की समझ विकसित करने पर भी जोर दिया गया।


बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर

कार्यक्रम में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में परिवार, विद्यालय एवं समाज की महत्वपूर्ण भूमिका के संबंध में जागरूक किया गया। बालिकाओं को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने, उनके अधिकारों का सम्मान करने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने का संदेश दिया गया।


महिला एवं बाल विकास की योजनाओं और हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी

कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में भी जानकारी दी गई। सखी वन स्टॉप सेंटर एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे में बताते हुए पात्र महिलाओं, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही महिलाओं एवं बच्चों की सहायता, सुरक्षा और शिकायतों के निराकरण के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 181, 1098, 1930 एवं 1515 की जानकारी देकर इनके उपयोग के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में प्रभारी एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी चिरमिरी सुश्री आरती, मिशन शक्ति से जेंडर विशेषज्ञ सुश्री शैलजा गुप्ता एवं कार्यालय सहायक दाऊ लाल, सखी वन स्टॉप सेंटर से केंद्र प्रशासक श्रीमती प्रियंका राजवाड़े, विधिक सेवा प्राधिकरण से अधिकार मित्र श्रीमती अंजनी यादव तथा जिला बाल संरक्षण इकाई से डाटा एनालिस्ट सुनील प्रजापति सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में महिलाएं और किशोरी बालिकाएं उपस्थित रहीं।

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