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यूसीसी पर सामाजिक संगठनों ने दिए सुझाव

रायपुर, 30 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सामाजिक संगठनों से सुझाव लेने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में स्वयंप...





रायपुर, 30 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सामाजिक संगठनों से सुझाव लेने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में स्वयंप्रभा फाउंडेशन और आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित, रायपुर के प्रतिनिधिमंडल ने समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष अपने सुझाव रखे। इसमें महिलाओं को समान अधिकार, आदिवासी परंपराओं का संरक्षण और लिव-इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों के भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई।

समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने प्रतिनिधियों के सुझावों को सुना। समिति की ओर से इन सुझावों को परीक्षण और विचार-विमर्श के दौरान शामिल करने की बात कही गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार और महिलाओं को न्यायपूर्ण संरक्षण देना होना चाहिए। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े कानूनों में समानता आने से कानूनी प्रक्रियाएं सरल होंगी और नागरिकों को न्याय पाने में सुविधा मिलेगी।

स्वयंप्रभा फाउंडेशन के अध्यक्ष शिव नारायण मुंदड़ा, डॉ. मुकेश शाह और आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष इन्द्रनाथ सिंह ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर विशेष सुझाव दिए। उन्होंने बहुविवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं, भरण-पोषण में असमानता और संपत्ति के अधिकारों में भेदभाव दूर करने के लिए प्रभावी प्रावधान बनाने पर जोर दिया। साथ ही बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार तथा विवाह और तलाक के मामलों में महिलाओं को न्यायपूर्ण संरक्षण देने की बात कही।

आदिवासी परंपराओं के संरक्षण पर जोर

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की करीब 32 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदायों से जुड़ी है। इनकी विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और सदियों पुरानी परंपराओं को ध्यान में रखकर ही समान नागरिक संहिता का स्वरूप तय किया जाना चाहिए। इसके लिए जनजातीय समुदायों के संवैधानिक अधिकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं का संरक्षण जरूरी है, ताकि किसी भी समुदाय के हित प्रभावित न हों।

लिव-इन संबंधों में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा

लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए। उन्होंने ऐसे संबंधों के पंजीयन की उपयुक्त व्यवस्था बनाने पर विचार करने के साथ उनसे जन्म लेने वाले बच्चों के उत्तराधिकार और संपत्ति संबंधी अधिकारों को स्पष्ट करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि बच्चों के भविष्य और अधिकारों की सुरक्षा के लिए न्यायसंगत कानूनी प्रावधान होने चाहिए।

प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदायों की भागीदारी से तैयार होने वाली समान नागरिक संहिता सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, समान नागरिक अधिकारों और सामाजिक समरसता को मजबूती देने में सहायक हो सकती है।


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