भू-राजस्व संहिता में बदलाव के बाद रजिस्ट्री के साथ ई-नामांतरण, डिजिटल नोटिस और जिओ-रेफरेंस्ड नक्शों पर जोर विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचा...
भू-राजस्व संहिता में बदलाव के बाद रजिस्ट्री के साथ ई-नामांतरण, डिजिटल नोटिस और जिओ-रेफरेंस्ड नक्शों पर जोर
विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक
रायपुर, 18 सितंबर 2026। जमीन के नामांतरण, सीमांकन और रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए लोगों को लंबे समय तक पटवारी से लेकर राजस्व न्यायालय तक चक्कर लगाने पड़ते थे। कागजी प्रक्रिया और मामलों के लंबित रहने से जमीन मालिकों का समय और पैसा दोनों खर्च होता था। अब भू-राजस्व संहिता में किए गए बदलावों के बाद इन प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने की दिशा में बदलाव किया गया है।
रजिस्ट्री के साथ नामांतरण
धारा 110 में बदलाव के बाद स्वतः ई-नामांतरण की व्यवस्था की गई है। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को अलग से कराने की जरूरत कम होगी। जमीन मालिक अपने जीवनकाल में ही कानूनी वारिसों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा सकेंगे। इससे उत्तराधिकार के बाद जमीन के बंटवारे और रिकॉर्ड को लेकर होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।
नोटिस और फाइलें भी ऑनलाइन
धारा 33 के तहत राजस्व मामलों में नोटिस और आधिकारिक सूचना डिजिटल माध्यम से भेजने का प्रावधान किया गया है। वहीं धारा 30 के तहत राजस्व न्यायालयों में रिकॉर्ड, प्रकरण और फाइलों के डिजिटल आदान-प्रदान की व्यवस्था की गई है। इससे कागजी फाइलों पर निर्भरता कम करने की कोशिश है।
नक्शे में साफ होगी जमीन की सीमा
भूमि सीमांकन और नक्शों से जुड़े विवादों में धारा 107 के तहत जिओ-रेफरेंस्ड नक्शों को आधार बनाया गया है। इससे जमीन की स्थिति और सीमाओं का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। पुराने नक्शों को लेकर होने वाली अस्पष्टता और विवादों में इससे मदद मिल सकती है।
धारा 70 में कृषि भूमि के अनावश्यक विखंडन पर रोक से जुड़े प्रावधान भी हैं, ताकि जोत का आकार बहुत ज्यादा न बंटे।
इन बदलावों का सीधा असर जमीन मालिकों से जुड़े रोजमर्रा के कामों पर पड़ना है। नामांतरण, नोटिस, रिकॉर्ड और सीमांकन जैसी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने से कार्यालयों और राजस्व अदालतों के चक्कर कम करने की कोशिश की गई है। अब इसका वास्तविक असर व्यवस्था के जमीन पर लागू होने और मामलों के समय पर निपटारे से तय होगा।

" alt="" />" alt="" />
" alt="" />" alt="" />
No comments