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सेवा की कहानी: डबरी से सिंचाई का सहारा, मछली पालन से बढ़ी अतिरिक्त आय की उम्मीद

उमेश गुप्ता की निजी भूमि पर 3 लाख रुपए से बनी डबरी, खेती के साथ शुरू किया मछली पालन रायपुर, 23 सितंबर 2026। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विका...



उमेश गुप्ता की निजी भूमि पर 3 लाख रुपए से बनी डबरी, खेती के साथ शुरू किया मछली पालन

रायपुर, 23 सितंबर 2026। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बकिरमा निवासी उमेश प्रसाद गुप्ता के लिए निजी भूमि पर बनी डबरी खेती के साथ अतिरिक्त आय का जरिया भी बन रही है। पहले सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने से खेती प्रभावित होती थी। ग्रामीण रोजगार योजना के तहत उनकी निजी भूमि पर डबरी निर्माण के लिए 3 लाख रुपए स्वीकृत हुए। डबरी बनने के बाद खेत में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी है।

सिंचाई के साथ मछली पालन का भी मिला अवसर

डबरी का उपयोग अब केवल सिंचाई के लिए नहीं हो रहा है। मत्स्य विभाग से मिले मत्स्य बीज से उमेश ने डबरी में मछली पालन शुरू किया है। मछलियां तैयार होने के बाद उनके विक्रय से अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है। इस तरह एक ही जल संरचना से उन्हें खेती के लिए सिंचाई और मछली पालन के जरिए आय का अतिरिक्त अवसर मिल रहा है।

उमेश प्रसाद गुप्ता कहते हैं, “पहले मेरे पास सिंचाई का साधन नहीं था। अब डबरी बन गई है और मछली पालन के लिए मत्स्य बीज भी मिला है। मछली पालन से आने वाले समय में लाभ मिलेगा और इससे परिवार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।”

उन्होंने योजनाओं का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।

जल संरक्षण से आजीविका तक

डबरी से वर्षा जल के संरक्षण के साथ खेतों को सिंचाई का सहारा मिला है। वहीं इसी जल संरचना में मछली पालन शुरू होने से परिवार के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता भी खुला है। उमेश गुप्ता की कहानी बताती है कि जल संरक्षण को खेती और आजीविका से जोड़कर ग्रामीण परिवार उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आय के नए अवसर तैयार कर सकते हैं।


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