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चूजा पालन से बसंती की बदली जिंदगी, 2700 रुपए से शुरू किया कारोबार

नारायणपुर के बेनूर गांव की महिला ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर बढ़ाई आमदनी, अब हर महीने 14-15 हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई रायपुर, 23 सितंबर ...



नारायणपुर के बेनूर गांव की महिला ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर बढ़ाई आमदनी, अब हर महीने 14-15 हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई

रायपुर, 23 सितंबर 2026। नारायणपुर जिले के वनांचल क्षेत्र की महिलाएं अब स्व-सहायता समूहों और आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। ग्राम पंचायत बेनूर की बसंती नाग ने भी चूजा पालन को अपनी आय का जरिया बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी है।

बसंती नाग स्थानीय रिद्धी सिद्धी स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह की बैठकों के दौरान उन्हें आईएफसी परियोजना के तहत चूजा पालन की जानकारी मिली। उन्होंने इस गतिविधि को अपनाने का फैसला किया और महज 2,700 रुपए के शुरुआती निवेश से 30 दिन के 30 चूजे खरीदे। एक चूजे की कीमत 90 रुपए थी।

देखभाल और प्रबंधन से बढ़ा कारोबार

तकनीकी मार्गदर्शन के साथ बसंती ने चूजों के दाना-पानी, टीकाकरण और देखभाल पर ध्यान दिया। बेहतर प्रबंधन से उनका चूजा पालन का कारोबार आगे बढ़ा और उन्होंने लगभग 500 से 600 चूजों का उत्पादन व विक्रय किया। इससे उन्हें करीब 14 से 15 हजार रुपए की अतिरिक्त मासिक आय होने लगी।

बसंती नाग का कहना है कि स्व-सहायता समूह और आईएफसी परियोजना के मार्गदर्शन से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है। अब वे बड़े पैमाने पर चूजा पालन कर आय बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।

दूसरी महिलाओं को भी मिली प्रेरणा

बसंती की सफलता से बेनूर गांव की दूसरी महिलाएं भी आजीविका के नए साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। यह उदाहरण बताता है कि प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं छोटे स्तर से स्वरोजगार शुरू कर अपनी पारिवारिक आय बढ़ा सकती हैं।


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