स्वच्छता कार्य से परिवार को आर्थिक संबल, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की बिक्री से अतिरिक्त आमदनी रायपुर, 23 सितंबर 2026। स्वच्छता अब केवल शहर...
स्वच्छता कार्य से परिवार को आर्थिक संबल, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की बिक्री से अतिरिक्त आमदनी
रायपुर, 23 सितंबर 2026। स्वच्छता अब केवल शहर और मोहल्लों को साफ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे परिवारों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी बन रहे हैं। बलरामपुर की श्रीमती प्रतिमा टोप्पो इसकी मिसाल हैं। स्वच्छाग्रही के रूप में काम करते हुए वे घर-घर से कचरा एकत्र करती हैं, उसका पृथक्करण करती हैं और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इस काम से उन्हें हर माह करीब 12 से 15 हजार रुपए की आय हो रही है।
मानदेय के साथ कचरे से अतिरिक्त आमदनी
प्रतिमा टोप्पो प्रतिदिन रिक्शे से घर-घर पहुंचकर कचरा एकत्र करती हैं। इसके बाद कचरे को सेग्रीगेशन शेड तक पहुंचाकर उपयोगी और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री अलग करती हैं। स्वच्छता कार्य के लिए उन्हें करीब 8 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलता है। वहीं पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की बिक्री से 4 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह अतिरिक्त आय होती है।
इस तरह स्वच्छता कार्य और कचरे के बेहतर प्रबंधन से वे हर माह लगभग 12 से 15 हजार रुपए कमा रही हैं।
परिवार के खर्च में कर रहीं मदद
प्रतिमा बताती हैं कि पहले परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में परेशानी होती थी। स्वच्छता कार्य से जुड़ने के बाद अब वे राशन और अन्य जरूरी खर्चों में आर्थिक सहयोग कर पा रही हैं। अपने श्रम से होने वाली आय ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है और परिवार के लिए आर्थिक रूप से सक्षम बनने का अवसर दिया है।
उनके लिए यह काम सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनने का जरिया है। नियमित रूप से स्वच्छता कार्य करने के साथ वे श्रम की गरिमा और स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल भी पेश कर रही हैं।
कचरे के पृथक्करण से आजीविका का अवसर
प्रतिमा टोप्पो की कहानी बताती है कि कचरे का उचित संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण स्वच्छता के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है। स्वच्छता गतिविधियों से जुड़कर महिलाएं अपने परिवार की आय बढ़ाने और आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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