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विशेष लेख : ढाई साल की उपलब्धियाँ: श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा छत्तीसगढ़

सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता छगन लाल लोन्हारे संयुक्त संचालक, जनसंपर्क रायपुर, 7 अगस्त 2026। ...




सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता

छगन लाल लोन्हारे
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर, 7 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। श्रमिक कल्याण को केवल योजनाओं तक सीमित न रखते हुए सरकार ने इसे सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार से जोड़कर लाखों श्रमिक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग ने योजनाओं का लाभ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से श्रमिकों तक पहुँचाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं।

श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार

राज्य सरकार द्वारा संगठित, असंगठित तथा निर्माण श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

श्रमिकों के पंजीयन, सहायता और विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी एवं सरल बनाने के लिए श्रम विभाग ने यूजर-फ्रेंडली वेबसाइट तथा 'श्रमेव जयते' मोबाइल एप विकसित किया है। इसके माध्यम से श्रमिक अब ऑनलाइन पंजीयन, आवेदन और अन्य सेवाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर रहे हैं।

प्रशासनिक विस्तार से मजबूत हुई श्रम व्यवस्था

श्रम विभाग ने ढाई वर्षों में प्रशासनिक ढाँचे को भी सुदृढ़ बनाया है। नवगठित पाँच जिलों—मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर तथा सक्ती—में श्रम अधिकारी कार्यालयों की स्थापना के लिए 20 नए पदों का सृजन किया गया। वर्तमान में राज्य के 10 जिलों में सहायक श्रमायुक्त कार्यालय तथा 23 जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय संचालित हैं। इससे अब प्रदेश के सभी 33 जिलों में श्रम विभाग की सेवाएँ उपलब्ध हैं।

रोजगार के साथ श्रमिक अधिकारों को भी मिली मजबूती

राज्य सरकार ने श्रमिक हितों और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से श्रम कानूनों में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। दुकानों एवं स्थापना अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की अनुमति तथा फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने जैसे निर्णयों ने रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ श्रमिक अधिकारों को भी मजबूत किया है।

17.82 लाख श्रमिकों को मिला योजनाओं का लाभ

श्रम विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धियों में श्रमिक पंजीयन और हितलाभ वितरण उल्लेखनीय रहा है। 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच लगभग 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। इसी अवधि में लगभग 17.82 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किया गया, जिन पर 800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई।

निर्माण श्रमिकों को लगभग 780 करोड़ रुपये तथा असंगठित श्रमिकों को लगभग 187 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। हितलाभ वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया गया है।

24×7 मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र बना भरोसे का माध्यम

मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र श्रमिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। यह केंद्र 24 घंटे, सप्ताह के सातों दिन संचालित किया जा रहा है। राज्यभर में मोबाइल शिविर आयोजित कर लाखों श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण तथा आवेदन संबंधी समस्याओं का मौके पर समाधान किया गया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के श्रमिकों को भी सरकारी सेवाओं का लाभ अपने क्षेत्र में ही मिलने लगा है।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से मिला मजबूत संबल

राज्य सरकार ने श्रमिक परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को भी नई मजबूती प्रदान की है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा मृत्यु सहायता, दिव्यांग सहायता, छात्रवृत्ति, शिक्षा सहायता सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हजारों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता

महिला श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत निर्माण एवं असंगठित क्षेत्र की 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता प्रदान की गई है।

वहीं 'शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना' के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए मेधावी शिक्षा सहायता, छात्रवृत्ति और निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग जैसी योजनाएँ उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बन रही हैं।

श्रमिक कल्याण में नई पहचान की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में श्रमिक कल्याण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का जो संकल्प लिया गया है, उसे श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग प्रभावी ढंग से धरातल पर उतार रहा है। पारदर्शी व्यवस्था, तकनीकी नवाचार, त्वरित सेवाएँ, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक सम्मान की सोच ने छत्तीसगढ़ को श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।

पिछले ढाई वर्षों की यह यात्रा केवल योजनाओं और आँकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि लाखों श्रमिक परिवारों के जीवन में विश्वास, सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि के नए अध्याय की शुरुआत है। यही सुशासन की वह दिशा है, जहाँ श्रमिक केवल विकास के सहभागी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रहे हैं।

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