सरकार के दावों में कृषि को नई रफ्तार, 25.52 लाख किसानों को 35 हजार करोड़ से ज्यादा की सहायता; उर्वरक-बीज की 98 प्रतिशत उपलब्धता रायपुर, 31...
सरकार के दावों में कृषि को नई रफ्तार, 25.52 लाख किसानों को 35 हजार करोड़ से ज्यादा की सहायता; उर्वरक-बीज की 98 प्रतिशत उपलब्धता
रायपुर, 31 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ में खेती को लाभकारी, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कई स्तरों पर काम तेज किया है। पर्याप्त खाद-बीज की उपलब्धता, किसानों को सीधे आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल सेवाओं और उद्यानिकी, पशुपालन व मत्स्य पालन को बढ़ावा देने से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने का दावा किया गया है।
कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने शुक्रवार को विभागीय उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को टिकाऊ बनाने पर है।
खरीफ सीजन में खाद की पर्याप्त व्यवस्था
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले 30 जुलाई तक 15.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है।
किसानों द्वारा अब तक 10.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव किया जा चुका है, जबकि करीब 4.93 लाख मीट्रिक टन खाद अभी उपलब्ध है। यूरिया का भंडारण लक्ष्य से अधिक 102 प्रतिशत तक किया गया है। विभाग ने खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण रोकने के लिए 5,466 निरीक्षण किए हैं, जिनमें कार्रवाई भी की गई है।
वहीं खरीफ सीजन के लिए 4.95 लाख क्विंटल बीज की मांग के विरुद्ध 4.85 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया गया है।
कृषक उन्नति योजना से किसानों को आर्थिक मजबूती
राज्य सरकार की कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक 25.52 लाख किसानों को डीबीटी के माध्यम से 35,892 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दी गई है।
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान के स्थान पर अन्य फसल लेने वाले किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को 11 हजार रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया है।
पीएम किसान सम्मान निधि से मिली बड़ी सहायता
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त में 493 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई। अब तक योजना के माध्यम से किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता मिल चुकी है।
एग्रीस्टैक और ई-केवाईसी के माध्यम से योजना को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है।
83 प्रतिशत क्षेत्र में पूरी हुई खरीफ बोनी
प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है। अब तक करीब 83 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। सामान्य से अधिक बारिश के कारण फसलों की स्थिति संतोषजनक बताई गई है।
आधुनिक मशीनों से आसान होगी खेती
कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को भी मशीनों का लाभ मिल रहा है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 49,983 किसानों को लाभ पहुंचाते हुए 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है। इसके लिए 147 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2025-26 में 57 हजार से अधिक किसानों को इससे जोड़ा गया है।
दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर
सरकार ने दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, आत्मनिर्भर दलहन मिशन और खाद्य तेल मिशन जैसी योजनाओं को लागू किया है।
किसानों को प्रमाणित बीज, प्रशिक्षण, फसल प्रदर्शन और अनुदान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
एग्रीस्टैक से डिजिटल हो रही खेती
प्रदेश के 19,389 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी की जा चुकी है। वहीं 36 लाख से अधिक किसानों का डिजिटल पंजीयन किया गया है।
एग्रीस्टैक के माध्यम से पीएम किसान, पीएम आशा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं को एकीकृत किया जा रहा है, जिससे किसानों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके।
उद्यानिकी में बढ़ा रकबा, नई सुविधाओं का विस्तार
पिछले ढाई वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।
फल, सब्जी, मसाला, फूल और औषधीय फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई है। ऑयल पाम क्षेत्र में करीब 50 प्रतिशत और बांस रोपण में 79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
हाईटेक नर्सरी, टिश्यू कल्चर लैब, ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, पैक हाउस और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
डेयरी और पशुपालन को मिला बढ़ावा
पशुपालन क्षेत्र में दूध, अंडा और मांस उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। सरकार ने दुग्ध उत्पादकों को नियमित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सहकारी दुग्ध महासंघ और एनडीडीबी के साथ मिलकर व्यवस्था मजबूत की है।
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में पशु उपचार की सुविधा पहुंचाई जा रही है। गौधाम योजना और गौशालाओं के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।
मत्स्य उत्पादन में छत्तीसगढ़ की बढ़ी पहचान
राज्य में मत्स्य पालन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जलक्षेत्र विकास, केज कल्चर, बायोफ्लॉक, तालाब निर्माण और झींगा पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है।
प्रदेश का मत्स्य उत्पादन करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन तक पहुंच गया है और छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है।
कृषि विपणन और अधोसंरचना को मजबूती
प्रदेश की 21 मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से जुड़ चुकी हैं। कृषि अवसंरचना निधि के तहत 1,900 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 3,026 करोड़ रुपये की उपलब्धि हासिल की गई है।
मंडियों और उपमंडियों में किसानों की सुविधा के लिए 885 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत और पूरे किए गए हैं।
बीज परीक्षण में छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि
रायपुर स्थित शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला को एनएबीएल मान्यता मिली है। यह छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त सरकारी बीज परीक्षण प्रयोगशाला बनी है। वर्ष 2025-26 में यहां 15 हजार बीज नमूनों का परीक्षण किया गया।
कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य
कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को प्रतिस्पर्धी बनाने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से खेती को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त उर्वरक, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक तकनीक के बेहतर समन्वय से छत्तीसगढ़ कृषि विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

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