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सेवा संकल्प अभियान - सेवा की कहानी: महतारी वंदन की बचत से सुमित्रा ने खोली ‘श्रृंगार सदन’, अब हर महीने कमा रहीं 2 हजार से ज्यादा

योजना की राशि खर्च करने के बजाय बचाई, जमा पूंजी से शुरू किया व्यवसाय; अब परिवार की आर्थिक मजबूती में निभा रहीं हिस्सेदारी रायपुर, 29 सितंब...



योजना की राशि खर्च करने के बजाय बचाई, जमा पूंजी से शुरू किया व्यवसाय; अब परिवार की आर्थिक मजबूती में निभा रहीं हिस्सेदारी

रायपुर, 29 सितंबर 2026। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कुम्हारीकला की सुमित्रा कर्ष ने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली मासिक सहायता को सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने राशि को नियमित रूप से बचाया और उसी बचत को अपने छोटे कारोबार की पूंजी बना दिया। बम्हनीडीह विकासखंड की सुमित्रा ने इसी जमा रकम से ‘श्रृंगार सदन’ नाम से श्रृंगार सामग्री की दुकान शुरू की। आज दुकान से लागत और अन्य खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने 2 हजार रुपये से अधिक की आय हो रही है।

बचत से जुटाई पूंजी, शुरू किया कारोबार

परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। सुमित्रा चाहती थीं कि वे भी पति के साथ परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक योगदान दें और अपनी आय का साधन तैयार करें। महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने खाते में मिलने वाली राशि ने उन्हें यह शुरुआत करने का अवसर दिया।

उन्होंने योजना से मिली रकम को धीरे-धीरे बचाना शुरू किया। पर्याप्त राशि जमा होने के बाद उससे श्रृंगार सामग्री खरीदी और गांव में ही ‘श्रृंगार सदन’ की शुरुआत कर दी। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह कारोबार अब उनकी नियमित आमदनी का जरिया बन चुका है।

परिवार की जरूरतों में बनीं भागीदार

दुकान से होने वाली आय से सुमित्रा परिवार और बच्चों की जरूरतों में पति का हाथ बंटा रही हैं। अपनी कमाई ने उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है। अब वे घर की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

गांव की दूसरी महिलाओं को भी मिली प्रेरणा

सुमित्रा के इस प्रयास को परिवार और गांव में सराहना मिल रही है। उन्हें अपनी आय का साधन खड़ा करते देखकर दूसरी महिलाएं भी छोटे कारोबार या स्वरोजगार के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के बारे में सोच रही हैं।

सुमित्रा की कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता को योजनाबद्ध बचत और स्वरोजगार से जोड़ा जाए तो छोटी रकम भी किसी नई शुरुआत की पूंजी बन सकती है। महतारी वंदन की राशि से शुरू हुआ उनका ‘श्रृंगार सदन’ अब परिवार की आय बढ़ाने के साथ गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन रहा है।


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