नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है, जिसके तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ...
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है, जिसके तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर नया प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यावसायिक (मर्चेंट) UPI लेन-देन पर MDR शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, सामान्य UPI उपयोगकर्ताओं और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांजेक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
सरकार का कहना है कि यह प्रस्ताव मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक भुगतान और मर्चेंट ट्रांजेक्शन से जुड़ा है। दूध, सब्जी, किराना जैसी रोजमर्रा की खरीदारी या ऑटो-रिक्शा और टैक्सी जैसे छोटे भुगतान पर इसका असर पड़ने की संभावना नहीं है। यदि कोई उपभोक्ता किसी अन्य व्यक्ति को ₹2,000 से अधिक UPI के जरिए भेजता है, तो उस पर भी कोई अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजेक्शन पर 0.25% से 0.40% तक MDR लगाए जाने पर चर्चा चल रही है। फिलहाल इसकी अंतिम दर और लागू होने की तारीख तय नहीं हुई है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 95% UPI ट्रांजेक्शन ₹2,000 से कम के होते हैं, जबकि केवल 5% लेन-देन ही इससे अधिक राशि के होते हैं।
क्या है MDR?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक और भुगतान सेवा प्रदाताओं को देते हैं। जनवरी 2020 में केंद्र सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए UPI और रुपे डेबिट कार्ड लेन-देन पर MDR समाप्त कर दिया था। अब नए विधेयक के जरिए सीमित दायरे में इसे फिर से लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस प्रस्ताव को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार का पक्ष है कि प्रस्ताव का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाना है और इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।


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