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अमित शाह बोले- विकसित भारत का सपना विकसित बस्तर के बिना अधूरा

Aber news जगदलपुर। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विश्वास जताया कि देश के सभी आदिवासी संभागों में बस्तर सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। ...



Aber news जगदलपुर। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विश्वास जताया कि देश के सभी आदिवासी संभागों में बस्तर सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गरीब, पिछड़े, दलित और आदिवासी समाज के लिए अनेक योजनाएं बनाई हैं, लेकिन लंबे समय तक बस्तर इन योजनाओं के लाभ से वंचित रहा।

उन्होंने कहा कि किसानों के धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने की योजना होने के बावजूद बस्तर के किसान इसका लाभ नहीं ले सके। प्रति व्यक्ति सात किलो धान-चावल देने की योजना भी यहां के लोगों तक पहले नहीं पहुंच पाई। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर के युवाओं को सरकारी नौकरियों में अवसर नहीं मिलता था।

अमित शाह ने बस्तर की संस्कृति, खानपान और परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां के व्यंजन पूरे देश में सबसे स्वादिष्ट हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने बस्तर की कला, संगीत, खेल और परंपराओं को नष्ट करने का काम किया। हजारों लोगों की जान गई और कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। कार्यक्रम में शहीद सुरक्षाकर्मियों के परिजन और ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्होंने नक्सलियों का साथ छोड़कर जिला रिजर्व गार्ड में शामिल होकर अभियान को सफल बनाने में योगदान दिया।

अमित शाह ने सुरक्षाबलों की भूमिका को बताया निर्णायक

श्री शाह ने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान की सफलता में जिला रिजर्व गार्ड और कोबरा जवानों की सबसे बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, छत्तीसगढ़ पुलिस, विशेष कार्य बल और बस्तर फाइटर सहित सभी सुरक्षाबलों के संयुक्त प्रयासों से यह सफलता संभव हुई है। उन्होंने बस्तर के पत्रकारों, समाज प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों के योगदान की भी सराहना की।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र सरकार बनने के बाद जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व और नक्सलवाद जैसी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाई गई। अब देश इन समस्याओं से काफी हद तक मुक्त होकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास की योजना

गृह मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 3000 नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है। केंद्र सरकार ने शुरुआती तौर पर 20 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं ताकि उनकी शिक्षा, कौशल विकास और समाज में पुनर्स्थापना सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यधारा में लौटने वाले लोग सम्मानपूर्वक जीवन जी सकेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य विकसित बस्तर के बिना अधूरा है। केंद्र और राज्य सरकार अगले पांच वर्षों में बस्तर को देश के अन्य विकसित क्षेत्रों के बराबर लाने का प्रयास करेंगी।

ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट का भी किया उल्लेख

ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि 45 डिग्री तापमान और बारूदी सुरंगों के बीच जवानों ने कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि यदि यह अभियान सफल नहीं होता तो नक्सल मुक्त बस्तर की कल्पना संभव नहीं थी। उन्होंने ऑपरेशन प्रहार, ऑपरेशन ऑक्टोपस और ऑपरेशन डबल बुल जैसे अभियानों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने आदिवासी समाज को भारी नुकसान पहुंचाया। गांवों के घर जलाए गए और निर्दोष लोगों की हत्या की गई। इसके बावजूद सुरक्षाबलों ने अपने प्राणों की आहुति देकर बस्तर को सुरक्षित बनाने का काम किया।

बस्तर की संस्कृति को पुनर्जीवित करने पर जोर

अमित शाह ने कहा कि अब बस्तर में निर्दोष आदिवासियों की हत्या नहीं होगी, स्कूल बंद नहीं होंगे और किसानों से अवैध वसूली नहीं की जाएगी। तेंदूपत्ता और धान का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन बस्तर की मूल संस्कृति को पुनर्जीवित करने का प्रयास हैं।

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