abernews . ज्येष्ठ अधिकमास में इस बार वरदा विनायक चतुर्थी बुधवार के दिन पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। भगवान गणेश...
abernews . ज्येष्ठ अधिकमास में इस बार वरदा विनायक चतुर्थी बुधवार के दिन पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। भगवान गणेश को समर्पित बुधवार और वरदान देने वाली चतुर्थी का यह दुर्लभ संयोग बेहद शुभ माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गणेश पूजा और व्रत करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि इस दिन ‘ॐ गं गणपतये नमः’ और ‘वक्रतुंड महाकाय’ मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है। सच्चे मन से की गई गणेश उपासना से बुद्धि तीव्र होती है और रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते हैं।
कब से कब तक रहेगी चतुर्थी तिथि
वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत 20 मई, बुधवार को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि की शुरुआत 19 मई को दोपहर 2:18 बजे से होगी और इसका समापन 20 मई सुबह 11:06 बजे तक रहेगा। उदया तिथि के अनुसार व्रत 20 मई को ही मान्य माना जाएगा।
इस दिन रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जिसे पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
अधिकमास में क्यों बढ़ जाता है व्रत का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिकमास में किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि वरदा चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है।
चूंकि बुधवार स्वयं गणपति जी का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए इस बार का संयोग विशेष रूप से शुभ और दुर्लभ माना जा रहा है।
गणपति बप्पा को प्रसन्न करने के 7 खास उपाय
- गणेश अथर्वशीर्ष का 11 या 21 बार पाठ करें।
- ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप अवश्य करें।
- भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
- मोदक का भोग लगाने से सुख-समृद्धि बढ़ती है।
- गणेश जी को सिंदूर का तिलक चढ़ाएं।
- शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
- जरूरतमंदों को दान करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है।
" alt="" />" alt="" />

" alt="" />" alt="" />
" alt="" />" alt="" />
No comments